अंतर्राष्ट्रीय
07-Mar-2026
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काठमांडू,(ईएमएस)। नेपाल के संसदीय चुनाव के जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे हिमालयी राष्ट्र की राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव का संकेत दे रहे हैं। जिसमें काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र (बालेन) शाह की पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी), प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है, जिससे बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना अब लगभग तय माना जा रहा है। 5 मार्च को हुए मतदान के बाद जारी मतगणना ने स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल की जनता ने पारंपरिक राजनीतिक घरानों और पुराने दिग्गजों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर झापा जिले में देखने को मिल रहा है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. ओली अपने गढ़ में बालेन शाह से पिछड़ गए हैं। जिस सीट पर ओली सात बार जीत दर्ज कर चुके थे, वहां बालेन शाह ने उन्हें हजारों वोटों के अंतर से पीछे छोड़ दिया है। ओली की पार्टी का कोई भी बड़ा पदाधिकारी या पूर्व मंत्री फिलहाल बढ़त बनाने में कामयाब नहीं हुआ है। यही हाल नेपाली कांग्रेस का है, जहां पार्टी अध्यक्ष गगन थापा भी अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे चल रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 275 सदस्यीय संसद के प्रत्यक्ष चुनाव वाली 165 सीटों में से आरएसपी अकेले 117 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है। इसके विपरीत, दशकों तक नेपाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली नेपाली कांग्रेस और के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल जैसी पार्टियां दहाई के आंकड़े के लिए संघर्ष कर रही हैं। रुझानों में नेपाली कांग्रेस महज 15 और यूएमएल 13 सीटों पर सिमटती दिख रही है। पुष्प कमल दहाल प्रचंड की पार्टी की स्थिति और भी खराब है; हालांकि प्रचंड खुद अपनी सीट बचाने में सफल रहे, लेकिन उनकी पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है।विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी सुनामी के पीछे युवाओं और जेन-जी मतदाताओं का भारी आक्रोश है। भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता और पुराने नेताओं की आपसी खींचतान से तंग आ चुकी जनता ने बालेन शाह के नई राजनीति के वादे पर भरोसा जताया है। नेपाल के कुल 1 करोड़ 89 लाख मतदाताओं ने इस बार बदलाव के लिए मतदान किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/07मार्च2026 --------------------------------

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