यह कौन सा असहिष्णुता अराजकता और वहशियत भरी सोच का नतीजा है जो रंग की दो छींट पड़ जाने पर उस होनहार नवयुवक के खून से होली खेलते हैं जिसका कोई कुसूर भी नही था जिसने कोई रंग भी नही डाला था जो दिन में घटित छोटी सी नोंकझोंक से अनजान था और होली की शाम अपने घर लौट रहा था लेकिन नफरती पडोसियों ने उस का निरीह कत्ल कर दिया। आपको बता दें कि जब 4 मार्च पूरा देश होली के रंगों में डूबा हुआ था, वहीं भारत की राजधानी दिल्ली खूनी होली में डूबी हुई थी। दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली के मौके पर हुए एक छोटे से झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया। जानकारी के मुताबिक, होली के दौरान 10 साल के बच्चे के गुब्बारा फेंकने को लेकर दो समुदाय में बहस हो गई। देखते ही देखते यह झगड़ा हिंसा तक पहुंच गया और मुस्लिम समुदाय के 10 से 15 लोगों ने एक हिंदू घर को निशाना बनाया और उनके बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। आपको बता दें कि उत्तम नगर में बुधवार की रात होली खेल रही 11 साल की बच्ची को नहीं मालूम था कि वह अपने परिवार के सदस्य पर जो पानी का गुब्बारा फेंक रही है, उसके छींटे किसी को इतने नागवार गुजरेंगे कि वह इलाके में सांप्रदायिक तनाव का कारण बन जाएंगे। उसे नहीं पता था कि वह गुब्बारा उसके परिवार के लिए तेजाब की तरह साबित होगा, जिसकी चपेट में उसका पूरा परिवार आ जाएगा। उसे यह भी नहीं मालूम था कि उस गुब्बारे से निकले पानी की वजह से परिवार ना केवल एक अनचाहे विवाद में पड़ जाएगा, बल्कि उसके परिवार के 26 साल के युवक तरुण की जान भी चली जाएगी। हम बात कर रहे हैं, शहर के उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में होली की रात हुए एक ऐसे विवाद की, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।विवाद की शुरुआत एक महिला पर रंग वाले पानी के छींटे लगने से हुई। उस लड़की ने अपने घर के नीचे खड़े अपने रिश्तेदारों पर एक पानी का गुब्बारा फेंका था, जो सड़क पर जा गिरा और फट गया, जिसके बाद रंगीन पानी के कुछ छींटे पड़ोस में रहने वाले दूसरे समुदाय की एक महिला को जा लगे। जिसके बाद हुए विवाद में हिंदू परिवार के युवक की जान चली गई। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया, साथ ही एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया। जबकि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही व्याप्त तनाव को देखते हुए पुलिस कोई कोताही नहीं बरत रही है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करते हुए इलाके में कड़ी सुरक्षा की गई है।दरअसल गुब्बारे में भरे पानी के छींटे लगने के बाद पड़ोस में रहने वाली वह महिला ना केवल भड़क गई, बल्कि उसने गंदी-गंदी गालियां देकर विवाद करना शुरू कर दिया। इसी दौरान उसने अपने परिजनों व अपने समुदाय के अन्य लोगों को बुला लिया और होली खेल रहे परिवार पर हमला किया। इस दौरान आरोपियों ने वहां मारपीट करते हुए जमकर तोड़फोड़ भी की। पीड़ित परिवार ने जैसे-तैसे अपने आप को घर के अंदर बंद करते हुए उनसे बचाया। इस झगड़े के दौरान परिवार का सदस्य तरुण अपने दोस्त के घर गया हुआ था और वो इस झगड़े से बेखबर था। होली खेलने निकला तरुण रात करीब 10.30 बजे अपने दोस्त के घर से वापस लौट रहा था, इसी दौरान रास्ते में करीब 8 से 10 आरोपियों ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान आरोपियों ने लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से तरुण को बेरहमी से पीटा। जब वह बेसुध हो गया तो आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजनों को झगड़े का पता चला तो वह मौके पर पहुंचे और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती किया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वारदात की सूचना मिलते ही उत्तम नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। तरुण की मौत की खबर आते ही फैल गया इलाके में तनाव तरुण की मौत की खबर जैसे ही पता चली तो उसके दोस्त, परिचित और इलाके में रहने वाले अन्य लोग बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने आरोपियों के घर के बाहर तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसी दौरान शुक्रवार को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कुछ लोगों ने एक कार और एक मोटरसाइकिल को आग लगा दी। जिसके बाद दमकल की गाड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया, जिन्होंने आग पर तुरंत काबू पा लिया। इसी बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर आरोपी परिवार के घर पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप करते हुए स्थिति और बिगड़ने से पहले भीड़ को तितर-बितर कर दिया। उधर बेटे तरुण की मौत के बाद पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार की एक महिला ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि घटना के सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। वहीं परिवार के कुछ सदस्यों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होने पर सड़कों को जाम करने की चेतावनी भी दे दी। मामला तब और गंभीर होने लगा जब मामले में हिंदूवादी संगठन के सदस्यों की भी एंट्री हो गई। एक हिंदू राजनीतिक संगठन के सदस्य भी थाने पहुंचे और विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए, नारे लगाए और घटना में शामिल सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।हालांकि शुक्रवार को पुलिस ने बताया कि इस वारदात के संबंध में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है, जबकि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं। अधिकारी ने कहा कि इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए। हाल ही में ऐसे कई वारदातों की झड़ी लगी है जिसमें हिन्दू युवकों किशोरों व्यापारियों को मजहबी नफरती हत्यारों ने कत्ल कर अपनी बर्बरता का हवाला दिया है। अभी बीस दिन पहले ईस्ट दिल्ली के मयूर विहार के आगे त्रिलोकपुरी में 42 साल के वीर सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी गई जानकारी के मुताबिक, यासीन और यामीन नाम के शख्स ने वीर सिंह की ही दुकान में चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। गोकुलपुरी में हिमांशु सीलमपुर में नाबालिग कुणाल हरिनगर में हरीश का भी इसी तरह मुसलिम हत्यारों ने कत्ल किया है। एक के बाद एक दिल्ली में घटित हो रही ये वारदात सामान्य अपराध नहीं है इन सब के पीछे कुछ नफरती लोगों द्वारा मजहब के नाम पर वहाटसएप और मजहबी तकरीरों के जरिए पैदा किया जा रहा नफरती जहर काम कर रहा है। हाल की वारदात का दक्षिणी दिल्ली का यह इलाका पाकिस्तान या बांग्लादेश का नही है लेकिन दो अलग अलग धर्म मजहब के परिवार के बीच इस तरह का खूनी संघर्ष समाज में बढ़ती असहिष्णुता और वहशियत भरी बर्बरता को उजागर करता है आखिर ये कौन सी मानसिकता है जो लोगों के बीच नफरत बो रही है? क्या पानी या रंग की दो बूंद पड़ जाने से किसी का मजहब अपमानित हो सकता है? क्या जाने अनजाने में ऐसा कोई बर्ताव किसी का कत्ल करने की सोच पैदा कर सकता है? क्या यह एक दर गुजर करने लायक बात नही थी? क्या ऐसे खून खराबा करने वाले लोगों में कानून का तनिक भी खौफ है?नयी दिल्ली की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के नियंत्रण में है सरकार गृहमंत्रालय को इन तमाम वारदातों का उच्च स्तरीय न्यायिक जांच समिति से विश्लेषण समीक्षा जांच करानी चाहिए ताकि नफरत का जहर बो रहे असामाजिक असहिष्णु कट्टरपंथी तत्वों को पहचान कर समुचित कार्यवाही की जाए और समाज को नफरती हिंसा से बचाया जा सके। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 8 मार्च /2026