ट्रेंडिंग
08-Mar-2026
...


- दुबई में वैश्विक कीमत से 30 डॉलर प्रति औंस कम भाव - उड़ानें रुकीं, शिपमेंट अटकी - सप्लाई चेन टूटी तो सस्ता हुआ सोना - युद्ध से हिला गोल्ड बाजार - दुबई में छूट पर बिक रहा सोना, भारत पर भी नजर नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक सोना बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण दुबई में सोने की ट्रेडिंग प्रभावित हुई है, जिसके चलते वहां सोना अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारी छूट पर बिक रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई के ट्रेडर्स वैश्विक बेंचमार्क कीमत से करीब 30 डॉलर प्रति औंस तक का डिस्काउंट दे रहे हैं, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 2,700 से 2,800 रुपये के बराबर है। जानकारी के मुताबिक दुबई में 8 मार्च की सुबह सोने का भाव लगभग 5,173.73 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। एक औंस में लगभग 28.34 ग्राम सोना होता है। हालांकि इस कीमत पर भी ट्रेडर्स अतिरिक्त डिस्काउंट दे रहे हैं, क्योंकि मौजूदा हालात में सोने की शिपमेंट और सप्लाई चेन बाधित हो गई है। दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई देशों के एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद हो गए हैं और कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। सोने की अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट आमतौर पर यात्री विमानों के कार्गो होल्ड के जरिए की जाती है। उड़ानों पर प्रतिबंध लगने से दुबई जैसे बड़े बुलियन ट्रेडिंग हब से सोने का निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके चलते सोने की खेप समय पर दूसरे देशों तक नहीं पहुंच पा रही है। शिपिंग और इंश्योरेंस लागत में बढ़ोतरी के साथ-साथ डिलीवरी में अनिश्चितता भी बढ़ गई है। ऐसे में कई अंतरराष्ट्रीय खरीदार नए ऑर्डर देने से हिचकिचा रहे हैं। व्यापारियों के सामने स्टोरेज और फाइनेंसिंग की लागत तेजी से बढ़ने का दबाव है। इसी कारण वे अपने पास मौजूद सोने के स्टॉक को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम दर पर बिक्री करने को मजबूर हो रहे हैं। दुबई लंबे समय से वैश्विक सोना व्यापार का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां सोने की रिफाइनिंग, ट्रेडिंग और एक्सपोर्ट बड़े पैमाने पर होता है। स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और कई अफ्रीकी देशों से आने वाले सोने की खेप भी अक्सर दुबई के जरिए एशियाई बाजारों तक पहुंचती है। मौजूदा संघर्ष के चलते इस पूरी सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक सोना बाजार पर और गहरा हो सकता है। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। भारत के संदर्भ में फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं मानी जा रही है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार देश में जनवरी के दौरान सोने का आयात अपेक्षाकृत अधिक हुआ था, जिससे बाजार में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि कुछ कार्गो शिपमेंट में देरी के कारण अल्पकालिक तौर पर भौतिक सोने की उपलब्धता में हल्की कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुबई से सोने की सप्लाई में व्यवधान कई महीनों तक जारी रहता है तो भारत में सोने की कीमतों और उपलब्धता दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि वहां के घटनाक्रम से ही आने वाले समय में सोने के वैश्विक कारोबार की दिशा तय होगी।