काठमांडू (ईएमएस)। नेपाल के संसदीय चुनावों में मची राजनीतिक हलचल ने न केवल हिमालयी राष्ट्र, बल्कि पड़ोसी देश भारत की कूटनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है। मतगणना के ताज़ा रुझानों के अनुसार, 35 वर्षीय बालेन शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ऐतिहासिक सुपर मेजॉरिटी की ओर बढ़ रही है। बालेन शाह न केवल प्रधानमंत्री पद के सबसे युवा दावेदार बनकर उभरे हैं, बल्कि उन्होंने झापा-5 सीट पर दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली को भारी मतों से पछाड़कर पुरानी राजनीति के अंत का संकेत दे दिया है। भारत के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना नई दिल्ली के हितों के लिए कितना ठीक रहेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह का उदय भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है। सकारात्मक पक्ष की बात करें तो बालेन शाह ने अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो से चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़े विवादित दमक इंडस्ट्रियल पार्क प्रोजेक्ट को हटाकर भारत को बड़ी राहत दी है। यह प्रोजेक्ट सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास होने के कारण भारत की सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा था। साथ ही, बालेन की शिक्षा भारत (बेंगलुरु) में हुई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों को नई ऊंचाई देंगे। वे नेपाल को बफर स्टेट के बजाय एक वाइब्रेंट ब्रिज के रूप में देखते हैं, जो आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोल सकता है। हालांकि, बालेन शाह का अनप्रेडिक्टेबल (अप्रत्याशित) स्वभाव भारत के लिए चिंता का विषय भी है। अतीत में उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत, चीन और अमेरिका के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था। सीता माता के जन्मस्थान को लेकर भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की उनकी मांग और अपने दफ्तर में ग्रेटर नेपाल का नक्शा लगाना, उनकी प्रखर राष्ट्रवादी छवि को दर्शाता है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह किसी भी बाहरी प्रभाव (चाहे वह दिल्ली हो या बीजिंग) के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। ऐसे में भारत को उनके साथ एक नई और बराबरी वाली कूटनीति पर काम करना होगा।कुल मिलाकर, बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए केपी शर्मा ओली के चीन समर्थक झुकाव की तुलना में एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, बशर्ते नई दिल्ली उनके युवा और राष्ट्रवादी विजन के साथ तालमेल बिठा सके। बालेन शाह की जीत नेपाल में बदलाव का प्रतीक है, और यदि वे भ्रष्टाचार मुक्त शासन और संतुलित विदेश नीति पर टिके रहते हैं, तो यह पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए सुखद संकेत होगा। वीरेंद्र/ईएमएस 08 मार्च 2026