- महाराष्ट्र से मजदूरी कर लौट रहे थे तीन साथी, घर पहुंचने से पहले ही सड़क पर खत्म हो गया सफर कटनी/बड़वारा (ईएमएस)। मजदूर जीवन की मजबूरियों और यातायात नियमों की अनदेखी का दर्दनाक परिणाम सोमवार देर रात राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर देखने को मिला। जगतपुर-उमरिया के समीप चपहनी मोड़ के पास एक तेज रफ्तार कार और मोटरसाइकिल के बीच हुई भीषण टक्कर में बाइक सवार चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना सोमवार रात करीब 11:30 बजे हुई। मोटरसाइकिल पर सवार चार युवक कटनी से उमरिया की ओर जा रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक जगतपुर-उमरिया गांव के पास चपहनी मोड़ पर पहुंची, विपरीत दिशा से आ रही तेज रफ्तार कार (क्रमांक एमपी-13-सीसी-4342) से उसकी आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए और घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई l मध्यरात्रि के सन्नाटे में हुई इस दुर्घटना के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंच गए। हादसे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए लंबा जाम लग गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तत्काल बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने बाइक सवार चारों युवकों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कार चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बड़वारा अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया है। मृतकों की पहचान धीरेन्द्र सिंह (18), रामकिशोर सिंह (26), रामदास सिंह (18) और इन्द्रभान सिंह (25) के रूप में हुई है, जो उमरिया जिले के मानपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के निवासी थे। परिजनों के अनुसार रामकिशोर, रामदास और इन्द्रभान महाराष्ट्र से मजदूरी कर सोमवार को ही लौटे थे। धीरेन्द्र सिंह उन्हें लेने के लिए मोटरसाइकिल से कटनी रेलवे स्टेशन गया था और चारों एक ही बाइक से घर लौट रहे थे।लेकिन आर्थिक मजबूरी और आवागमन का सड़क अथवा रेल मार्ग से साधन न होने के कारण सभी चार लोगों का एकमात्र साधन बाइक पर बैठना उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। घर पहुंचने से पहले ही सड़क पर उनका जीवन समाप्त हो गया। यह हादसा एक बार फिर उन सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को उजागर करता है, जिनमें रोजी-रोटी की तलाश में भटकता मजदूर वर्ग अक्सर सुरक्षा और नियमों से समझौता करने को मजबूर हो जाता है—और कई बार इसकी कीमत जीवन देकर चुकानी पड़ती है। सत्यदेव चतुर्वेदी/ 10 मार्च 26