-विपक्ष का जोरदार हंगामा और नारेबाजी के साथ सदन से किया वाकआउट -ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर असर की आशंका नई दिल्ली,(ईएमएस)।पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ईरान पर इजरायल तथा अमेरिका के हमलों के बाद उत्पन्न गंभीर हालात को लेकर सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में हंगामें के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने अपनी बात रखी। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 176 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई। विपक्ष ने उच्च सदन में मांग ठुकराए जाने को लेकर जोरदार हंगामा किया और विदेश मंत्री के बयान के बीच सदन से वाकआउट किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वर्तमान स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन में कहा कि मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन भारत सरकार वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए अर्मेनिया के रास्ते निकासी की व्यवस्था की जा रही है। क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास लगातार लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच भी विदेश मंत्री जयशंकर ने अपना बयान जारी रखा। उन्होंने सदन को बताया, कि भारत सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर रखा है मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता भी व्यक्त की थी। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने तथा तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की थी। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना कठिन है, हालांकि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी कहा, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत का पड़ोसी क्षेत्र है और वहां की स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जयशंकर ने सदन को जानकारी दी कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जबकि ईरान में भी पढ़ाई या रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहां से तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है। मौजूदा संघर्ष के कारण सप्लाई चेन में व्यवधान और अस्थिरता जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, हालांकि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि संघर्ष के चलते क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में गिरावट आई है और सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। इस दौरान भारत के दो व्यापारिक जहाजों के नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक अभी भी लापता है। विदेश मंत्री के अनुसार अब तक करीब 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं और सरकार बाकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। हिदायत/ईएमएस 09मार्च26