नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में संभावित एलपीजी संकट को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कुछ मजबूरियों के कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुक रहे हैं और इसकी कीमत देश को चुकानी पड़ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता पैदा हो गई है, इससे तेल और गैस बाजार प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच केजरीवाल ने दावा किया कि देशभर में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी की आपूर्ति रोकी गई है। उनके अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को छोड़कर अन्य सभी कारोबारी प्रतिष्ठानों को फिलहाल एलपीजी गैस नहीं दी जा रही है और गैस केवल घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि आने वाले दिनों में गैस और तेल की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। दरअसल, यह बयान उस समय आया जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे दिया है। मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और वैश्विक आपूर्ति में बाधा को देखकर देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इसलिए अतिरिक्त एलपीजी उत्पादन को विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए निर्देशित किया गया है। मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने और जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोकने के लिए एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि लागू की गई है। मोदी सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने तथा प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है। मोदी सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम नागरिकों को रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और संकट के समय ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर सवाल उठा रहा है। आशीष दुबे / 10 मार्च 2026