अंतर्राष्ट्रीय
11-Mar-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अमेरिकी सेना के लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। पेंटागन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईरान के हमले में घायल एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई है, जिससे इस युद्ध में अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर सात हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि यह सैनिक 1 मार्च को सऊदी अरब स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसे बेहतर इलाज के लिए जर्मनी भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन शनिवार रात उसने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुमान से कहीं ज्यादा भारी पड़ रहा है ईरान। यह क्षति ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में डोवर एयर फोर्स बेस पर उन छह सैनिकों के पार्थिव शरीरों की अगवानी की थी, जो कुवैत के शुआइबा पोर्ट पर हुए ड्रोन हमले में मारे गए थे। 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध ने न केवल अमेरिकी सैनिकों, बल्कि इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत के दावों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में अब तक 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। सैन्य विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान की सैन्य क्षमता का जो आकलन किया था, वह धरातल पर गलत साबित हो रहा है। प्रशासन को उम्मीद थी कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बाद ईरान कमजोर पड़ेगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। ईरान ने न केवल अपने हमले जारी रखे हैं, बल्कि वह पीछे हटने के मूड में भी नहीं दिख रहा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस बार ईरान की युद्ध नीति में बड़ा बदलाव आया है; अब वह बिना किसी पूर्व चेतावनी के और बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। युद्ध की समाप्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला वह और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मिलकर करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय उनका होगा, लेकिन इसमें इजरायल की सहमति महत्वपूर्ण होगी। ट्रंप का दावा है कि यदि दोनों देश मिलकर कार्रवाई नहीं करते, तो ईरान इजरायल के अस्तित्व को संकट में डाल देता। फिलहाल, व्हाइट हाउस के संकेतों से स्पष्ट है कि यह खूनी संघर्ष अभी कुछ और हफ्तों तक खिंच सकता है, जिससे क्षेत्र में मानवीय और सैन्य संकट और गहराने की आशंका है। वीरेंद्र/ईएमएस 11 मार्च 2026