-ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने एक इंटरव्यू में किया खुलासा तेहरान (ईएमएस)। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लांह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तऑराधिकारी चुना गया है, लेकिन अयातुल्लािह अली खामेनेई कभी नहीं चाहते थे कि उनका बेटा उनका उत्तकराधिकारी बने। यहां तक कि खामेनेई ने जिंदा रहते कई बार इस बात को दोहराया था। इसके पीछे किसी हमले या बेटे की जान जाने का डर नहीं है, बल्कि वजह कुछ और ही थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के एक सीनियर सदस्य महमूद मोहम्मदी इराकी ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब असेंबली की एक बैठक में उत्तराधिकार को लेकर चर्चा हो रही थी और खामेनेई के बेटों में से एक की योग्यताओं की जांच करने का प्रस्ताव रखा गया, तो खुद अयातुल्लांह अली खामेनेई ने इसमें दखल दिया। खामेनेई ने साफ तौर पर इस चर्चा को आगे बढ़ाने से मना कर दिया था। खामेनेई के इस विरोध के पीछे की असली वजह थी कि वे नहीं चाहते थे कि उन पर वंशवाद का दाग लगे। वे नहीं चाहते थे कि लोग ये कहें कि अपने बेटे को ही गद्दी सौंप दी। बता दें ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति राजशाही को खत्म करने के लिए हुई थी। खामेनेई का मानना था कि अगर उनका बेटा उनकी जगह लेता है, तो दुनिया भर में और ईरान की जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि ईरान में ‘वंशानुगत नेतृत्व प्रणाली’ यानी राजा-महाराजाओं वाला सिस्टम फिर से लौट आया है। वह नहीं चाहते कि जिस क्रांति ने वंशवाद को उखाड़ फेंका, उसके माथे पर उनके परिवार की वजह से कलंक लगे। मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर चुने जाने से पहले आधिकारिक तौर पर सरकार में किसी भी पद पर नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक मोजतबा के पास न केवल अपने पिता का भरोसा है, बल्कि उनके संबंध ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ भी बहुत गहरे हैं। कई अहम जिम्मेदारियां पर्दे के पीछे से मोजतबा ही संभालते हैं। यही वजह है कि जानकार उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ करती है, जिसमें 88 धार्मिक विद्वान शामिल होते हैं। यह संस्था तय करती है कि देश की कमान किसके हाथ में होगी। इराकी के खुलासे से यह साफ होता है कि भले ही असेंबली के कुछ सदस्य मोजतबा के नाम पर विचार करना चाहते थे, लेकिन खुद सुप्रीम लीडर ने इस पर ब्रेक लगा दिया है ताकि ईरान की लोकतांत्रिक और क्रांतिकारी छवि को नुकसान न पहुंचे। सिराज/ईएमएस 11 मार्च 2026