नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजार और रसोई तक पहुँचता दिख रहा है। वैश्विक उथल-पुथल के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एलपीजी सप्लाई में आ रही दिक्कतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) लागू कर दिया है, ताकि एलपीजी और सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वहीं खबरें आ रहीं है कि एलपीजी का सिर्फ दो दिन का स्टॉक बचा और रेस्टोरेंट उद्योग में हाहाकार मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि बुकिंग के 4-5 दिनों बाद भी गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब आवश्यक सेवाओं को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि कुछ गैर-जरूरी उद्योगों को मिलने वाली आपूर्ति को सीमित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पश्चिम एशिया के संकट का बोझ आम आदमी पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक संकट के दौरान जनता का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे जनता तक यह संदेश पहुँचाएं कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और हमारी सप्लाई चेन मैनेजमेंट किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। जहाँ तक रसोई गैस की कीमतों में हाल ही में हुई 60 रुपये की वृद्धि का सवाल है, सरकार का कहना है कि यह मौजूदा युद्ध की स्थिति के कारण नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडर-रिकवरी की वजह से है। हालांकि, युद्ध की वजह से परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते शनिवार को ही एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे, जिसमें घरेलू सिलेंडर पर 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर पर 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। सरकार अब इस बात पर जोर दे रही है कि कीमतों को स्थिर रखा जाए और जमाखोरी या कृत्रिम कमी को रोकने के लिए अधिनियम का सख्ती से पालन हो। वीरेंद्र/ईएमएस/11मार्च2026