नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली में गहराते कमर्शियल एलपीजी संकट के कारण ऐतिहासिक मोती महल रेस्टोरेंट को 40 साल बाद कोयले की आंच पर लौटना पड़ा है। अब सिग्नेचर डिशेज कोयले पर पक रही हैं। देश भर में गहराए कमर्शियल गैस (एलपीजी) संकट का असर अब राजधानी दिल्ली के सबसे ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध मोती महल रेस्टोरेंट की रसोई तक पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि गैस की किल्लत के कारण करीब 40 साल बाद इस आइकोनिक रेस्टोरेंट में कई प्रमुख डिशें गैस की जगह वापस कोयले (चारकोल) की आंच पर पकाई जा रही हैं। मोती महल सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि स्वाद का एक ऐतिहासिक केंद्र है। यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी और इंटरनेशनल मास्टर शेफ गॉर्डन रामसे जैसी विश्वस्तरीय हस्तियां भोजन का लुत्फ उठा चुकी हैं। रेस्टोरेंट के मालिक विनोद चड्ढा ने मौजूदा हालातों की जानकारी देते हुए बताया कि गैस की कमी ने उनके कामकाज के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। पहले रेस्टोरेंट में हर हफ्ते औसतन 6 कमर्शियल गैस सिलेंडरों की खपत होती थी, लेकिन अब बड़ी मुश्किल से सिर्फ 3 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। गैस की इस भारी कमी के कारण किचन में लगातार चलने वाले कई गैस स्टोव अब खाली पड़े रहते हैं।