भोपाल(ईएमएस)। प्रथम तीर्थकर ऋषवदेव भगवान के जन्मकल्याणक पर आज मंगलवारा जैन धर्मशाला में आयोजित विचार संगोष्ठी में पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज नें कहाँ कि भगवान ऋषवदेव जी नें समूची मानवता को जीवन जीने की कला सिखाई। कृषि, मसी, असि, वाणिज्य, शिल्प, कलाओं का ज्ञान कराया। मुनि श्री नें इस अवसर पर भगवान द्वारा बताये 8 संकल्पओं के बारे में बताते हुए सबको शपथ दिलाई कि सभी इन सदमार्गो पर चलेंगे और अपने जीवन को सार्थक करेंगे। इस अवसर पर मुनि श्री अनंत सागर जी नें भी भगवान ऋषवदेव के जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ मार्गदर्शक शशि भाई सेठ नें कहाँ ऋषवदेव के पुत्र सम्राट भरत के नाम पर ही भारत देश बना है और आज भारत उन्ही के आशीर्वाद से सशक्त बन रहा है.। विषय प्रवर्तन एआईजी पीएचक्यू मलय जैन नें ऋषवदेव भगवान के जीवन चरित्र को हर धर्म के ग्रंथों में वर्णन के बारे में बताया। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कार्यक्रम के पूर्व सभी ने भगवान आदिनाथ के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया। संचालन संयोजक पंकज प्रधान नें किया। इस अवसर पर पंकज जैन सुपारी, पार्षद पूजा शर्मा, आशीष ठाकुर, राकेश गोहिल, संजय मुगावली, जयदीप शास्त्री आदि नें भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में मनोज जैन, शैलेन्द्र माया, मनोज मन्नू, सतीश शीतल, दीपेश जैन, राजेश डालडा,उज्जवल जैन, डा अनुराग जैन, शैलेश प्रधान, विनोद एम पी टी सहित अनेक भक्त गण उपस्थित थे। अंशुल जैन / 12 मार्च, 2026