राष्ट्रीय
14-Mar-2026


इलाहाबाद (ईएमएस)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल में रमजान के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने के मामले में स्थानीय प्रशासन पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी मस्जिद या निजी परिसर में नमाज अदा करने वालों की संख्या सीमित नहीं हो सकती। यदि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ है, तब अधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए। यह मामला संभल में रमजान के दौरान नमाज रोकने से जुड़ा है। इस पर सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच कर रही है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि हर समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान करने की पूरी स्वतंत्रता मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई पूजा या धार्मिक कार्यक्रम निजी संपत्ति पर हो रहा है, तो इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। राज्य का हस्तक्षेप केवल तब जरूरी होता है जब धार्मिक आयोजन सार्वजनिक भूमि पर हो या सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहा हो। इस मामले में याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि गाटा संख्या 291 पर स्थित परिसर में रमजान के दौरान उन्हें नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वहां मस्जिद मौजूद है, हालांकि अदालत में मस्जिद या पूजा स्थल की कोई तस्वीर पेश नहीं की गई। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गाटा संख्या 291 का मालिकाना हक मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम दर्ज है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए वहां केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी। हालांकि अदालत ने राज्य की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना। मामले में आगे की सुनवाई 16 मार्च को होगी, जिसमें याचिकाकर्ता अतिरिक्त हलफनामा और साक्ष्य प्रस्तुत करेगा। आशीष दुबे /14 मार्च 2026