राष्ट्रीय
14-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर्स, समलैंगिक पुरुषों और महिला यौनकर्मी के रक्तदान पर लगी रोक को सही ठहराया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह फैसला किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि कई स्वास्थ्य अध्ययनों में पाया गया है कि इन समूहों में एचआइवी संक्रमण का खतरा आम लोगों की तुलना में 6 से 13 गुना अधिक हो सकता है। केंद्र ने कहा कि राष्ट्रीय रक्त नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रक्तदान केवल सुरक्षित डोनर समूहों से ही लिया जाए, ताकि मरीजों को संक्रमण का खतरा न हो। परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा कि ट्रांसजेंडर्स, समलैंगिक पुरुषों और महिला यौनकर्मी में एचआईवी के साथ-साथ हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी संक्रमण का जोखिम भी ज्यादा पाया गया है। सरकार के अनुसार, ऐसे उच्च जोखिम वाले समूहों से रक्त लेना राष्ट्रीय रक्त नीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। स्वास्थ्य मंत्रालय की 2020–21 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि सामान्य वयस्क आबादी की तुलना में इन विशेष समूहों में एचआईवी संक्रमण का प्रसार 6 से 13 गुना अधिक है। केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि इस तरह के प्रतिबंध केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में लागू हैं। सुबोध/१४-०३-२०२६