नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनावी समर के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की चुनावी रणनीति के आगे विपक्ष की तमाम कोशिशें बौनी साबित हुईं। बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर सोमवार को हुए मतदान में एनडीए ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 9 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्ष के खाते में महज 2 सीटें आईं। बिहार में जहाँ आरजेडी और ओवैसी का समीकरण विफल रहा, वहीं ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी का साथ भी कोई कमाल नहीं दिखा सका। कुल 37 सीटों के अंतिम आंकड़ों पर नजर डालें तो एनडीए को 22 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्ष 15 सीटों पर सिमट गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इन 37 सीटों में से 26 सदस्यों का निर्वाचन पहले ही निर्विरोध हो चुका था, जिनमें सत्तापक्ष और विपक्ष के पास 13-13 सीटें थीं। सोमवार के नतीजों ने एनडीए के पक्ष में पलड़ा पूरी तरह भारी हो गया। एनडीए की 22 सीटों में से भाजपा ने 13, जेडीयू ने 2, और अन्य सहयोगियों जैसे शिवसेना (शिंदे), एनसीपी (अजित पवार), पीएमके और एआईएडीएमके ने शेष सीटें जीती हैं। विपक्ष की 15 सीटों में कांग्रेस को 6, टीएमसी को 4 और डीएमके को 3 सीटें मिली हैं। राज्यवार नतीजों का विश्लेषण करें तो महाराष्ट्र की 7 सीटों में से भाजपा को 4 सीटें मिली हैं। बिहार की 5 सीटों पर जेडीयू ने अपनी 2 सीटें बरकरार रखीं, जबकि भाजपा को 2 सीटों का लाभ हुआ और आरजेडी को अपनी दोनों सीटें गंवानी पड़ीं। ओडिशा में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार को भी जीत दिलाने में सफलता पाई। हरियाणा में मुकाबला बराबरी का रहा जहाँ भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली। दक्षिण भारत में तमिलनाडु की 6 सीटों पर एआईएडीएमके और पीएमके अपनी साख बचाने में सफल रहे, जबकि तेलंगाना की दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने अपना किला सुरक्षित रखते हुए 4 सीटें जीतीं। एनडीए को सीधे तौर पर 10 सीटों का फायदा इस चुनाव में एनडीए को सीधे तौर पर 10 सीटों का फायदा हुआ है। चुनाव से पहले इस कोटे में एनडीए के पास 12 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 22 हो गई हैं। इसके विपरीत, विपक्ष के पास पहले 25 सीटें थीं, जो घटकर 15 रह गई हैं। भाजपा ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए सीटों की संख्या 9 से 13 कर ली है। कांग्रेस को भी 2 सीटों का मामूली फायदा मिला है, लेकिन क्षेत्रीय दलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। विशेषकर बिहार में आरजेडी और तेलंगाना में बीआरएस का खाता भी नहीं खुल सका, जबकि डीएमके को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ा। वीरेंद्र/ईएमएस/17मार्च2026