क्षेत्रीय
19-Mar-2026
...


- कचरे में आग बनी स्वास्थ्य का संकट जबलपुर, (ईएमएस)। गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर में कचरे के ढेरों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर का बड़ा हिस्सा अब जहरीले धुएं की चादर में लिपटा नजर आ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति शास्त्री ब्रिज के नीचे बने डंपिंग जोन की है, जो अब स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए स्वास्थ्य संकट बन चुका है। सवाल उठने लगा है, क्या जबलपुर गैस चैंबर बनता जा रहा है? प्राप्त जानकारी के अनुसार गत सुबह 6:25 बजे शास्त्री ब्रिज के नीचे कचरे के पहाड़ में भीषण आग लग गई। काले धुएं के गुबार ने आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। इसी दिन दोपहर में छुई खदान क्षेत्र में भी कचरे के ढेर ने आग पकड़ ली। रांझी से पहुंची दमकल टीम ने आग बुझाई। वहीं बिलहरी क्षेत्र में हनुमान मंदिर के पास सूखे पत्तों में लगी आग को स्थानीय लोगों ने समय रहते बुझाया। लगातार हो रही इन घटनाओं ने नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डंपिंग जोन बना ज्वालामुखी…. शास्त्री ब्रिज के नीचे जमा कचरा अब केवल गंदगी नहीं बल्कि शहर के बीचों-बीच एक सुलगता ज्वालामुखी बन चुका है। यह डंपिंग साइट रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास स्थित है, जिससे किसी बड़े रेल हादसे की आशंका भी बनी रहती है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में उठने वाला गाढ़ा काला धुआं सीधे घरों में प्रवेश कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो रही है। डॉक्टर की चेतावनी, यह धीमा जहर......... शहर के वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. ऋषि डावर ने बताया, प्लास्टिक और रासायनिक कचरा जलने से निकलने वाला धुआं बेहद जहरीला होता है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, डाइऑक्सिन और अन्य हानिकारक गैसें होती हैं, जो फेफड़ों पर सीधा असर डालती हैं। अस्थमा के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। लंबे समय तक ऐसे धुएं में रहने से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।” डॉक्टरों के अनुसार पिछले कुछ समय में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। कबाड़ी नेटवर्क पर सवाल …. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा बीनने वाले कीमती सामान निकालने के बाद शेष कचरे में आग लगा देते हैं। प्लास्टिक और रासायनिक अपशिष्ट के जलने से जहरीली गैसें हवा में घुल रही हैं। रेलवे लाइन के पास होने के कारण ट्रेन यात्रियों को भी इस दमघोंटू धुएं का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से डंपिंग जोन को शहर के बाहर स्थानांतरित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल … नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने पहले कॉम्पैक्टर मशीनों के खराब होने का हवाला देकर जल्द कचरा हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, स्थिति जस की तस बनी हुई है। मशीनों के खराब होने का बहाना बनाकर शहरवासियों को जहरीले धुएं के बीच जीने के लिए छोड़ दिया गया है। लगातार हो रही आग की घटनाएं, बढ़ता वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ता असर ये सब मिलकर एक गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। अगर समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो हालात और भयावह हो सकते हैं। सुनील साहू / शहबाज / 19 मार्च 2026