मनोरंजन
20-Mar-2026
...


-समर्थकों ने कहा- समानता और आपसी सम्मान के मूल्यों को बनाए रखने जरूरी वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में हिंदू-विरोधी कट्टरता की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव जोर पकड़ रहा है। 400 से ज्यादा समुदाय के सदस्यों ने इस कदम का समर्थन किया है और कानून बनाने वाले हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली बढ़ती घटनाओं पर गवाहों के बयान सुन रहे हैं। मिनेसोटा सीनेट में 9 मार्च को पेश किए गए इस प्रस्ताव का मकसद अमेरिका में रह रहे हिंदू समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव को औपचारिक रूप से मान्यता देना और धार्मिक स्वतंत्रता, बहुलवाद व आपसी सम्मान के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका जिसने इस मुहिम की अगुवाई की है, उन्होंने कहा कि यह पहल मान्यता और सुरक्षा हासिल करने के लिए हिंदू समुदाय के लगातार प्रयासों को दर्शाती है। समुदाय के नेताओं ने मिनेसोटा सीनेट की न्यायपालिका और सार्वजनिक सुरक्षा समिति के सामने गवाही दी और राज्य व देशभर में सामने आई घटनाओं का जिक्र किया। इनमें एदिना में एक मंदिर को निशाना बनाकर की गई नफरती बयानबाजी, मेपल ग्रोव में पुजारियों के घरों में हुई चोरियां और अतीत में हिंदू संस्थानों पर हुए तोड़फोड़ और डराने-धमकाने के मामले शामिल थे। हिंदू समुदाय के सदस्यों द्वारा सौंपे गए एक पत्र में कानून बनाने वालों से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की गई। एक मीडिया विज्ञप्ति के मुताबिक कुछ ही दिनों के भीतर 400 से ज्यादा मिनेसोटावासियों द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में हिंदूफोबिया के बारे में ज्यादा जागरूकता फैलाने, नफरती घटनाओं की रिपोर्टिंग के बेहतर तंत्र बनाने, और भेदभाव-विरोधी व विविधता से जुड़ी पहलों में हिंदू समुदायों को ज्यादा मजबूती से शामिल करने की मांग की गई है। यहूदी समुदाय संबंध परिषद के उप-कार्यकारी निदेशक ने कानून बनाने वालों से कहा कि धार्मिक नफरत का सामना करने के लिए उसे स्पष्ट रूप से स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय को साफ तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। समर्थकों ने व्यापक रुझानों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने देशभर में हुई घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें मंदिरों में हुई गोलीबारी, हमले और ऑनलाइन नफरती अभियान शामिल हैं। सीओएचएनए ने कहा कि हिंदू अमेरिकियों ने लंबे समय से मिनेसोटा और संयुक्त राज्य अमेरिका के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने में योगदान दिया है। समर्थकों ने कहा कि यह सुनिश्चित करना कि वे बिना किसी डर के आजादी से अपने धर्म का पालन कर सकें, समानता और आपसी सम्मान के मूल्यों को बनाए रखने के लिए जरूरी है। संगठन ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और धार्मिक भेदभाव का मुकाबला करने के व्यापक प्रयासों के लिए सांसदों, समुदाय के नेताओं और विभिन्न धर्मों के भागीदारों के साथ काम करना जारी रखेगा। सिराज/ईएमएस 20 मार्च 2026