20-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले दिनों ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत में ब्रिक्स के साझा बयान में अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले की निंदा की और ब्रिक्स देशों की एकजुटता की मांग की थी। ब्रिक्स की अध्यक्षता वर्तमान में भारत के पास है। नई दिल्ली को सभी ब्रिक्स देशों की सहमति से साझा बयान तैयार करना है। इसमें मुश्किलें है कि ब्रिक्स के कई देश ईरान-इजराइल युद्ध में प्रभावित हैं। ईरान में करीब 9 हजार भारतीय थे। आने वाले वक्त में करीब 842 भारतीय नागरिक अजरबैजान और अर्मीनिया के रास्ते भारत आएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि कई लोगों ने खुद को दूतावास में रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए, हमारा अंदाजा था कि 9,000 लोग थे। इनमें से, लड़ाई शुरू होने से पहले काफी संख्या में छात्र लौट आए थे। अभी करीब 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र और व्यवसाय करने वाले लोगों के साथ-साथ यहां से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्तों से लौटने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि वहां यात्रा करने वाले 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट आए हैं, वे आर्मेनिया के रास्ते आए थे। तीन या चार और बचे हैं, जिनके भी एक या दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है। जायसवाल ने बताया कि 772 लोग घर लौटने के लिए ईरानी जमीनी बॉर्डर पार करके आर्मेनिया चले गए, जबकि अजरबैजान के रास्ते पर गतिविधी धीमी है, 110 भारतीय नागरिकों में से कुछ अभी लौटने वाले हैं और कुछ पहले ही भारत वापस आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ईरान में भारतीय नागरिकों को दी जा रही मदद के बारे में बताते हुए जायसवाल ने कहा था कि कई नागरिक घर लौट आए हैं, जबकि जो लोग स्वदेश लौटने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मदद जारी है। मंत्रालय ने ईरान छोड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों से तेहरान में भारतीय दूतावास द्वारा जारी की गई सलाह का पालन करने का आग्रह किया था। बात दें बीते दिनों एनआइए ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को हिरासत में लिया है। जायसवाल ने बताया कि इनके लिए कॉन्सुलर एक्सेस का अनुरोध मिला है। उन्होंने कहा कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। एजेंसियां इसकी जांच कर रही है। भारत में कुछ ऐसे इलाके है जो प्रतिबंधित है और कुछ सरक्षित जगहें भी है। उन इलाकों में जाने के लिए अनुमति की जरूरत होती है। अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों के पास विशेष अनुमति थी या नहीं, यह मामला अब कोर्ट में है। सिराज/ईएमएस 20मार्च26