लेख
20-Mar-2026
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- सारी दुनिया में मुद्रा संकट? जब से रूस-यूक्रेन, इजराइल और फिलिस्तीन के बीच में युद्ध शुरू हुआ है, उसके बाद से सारी दुनिया में सोने-चांदी और अन्य महत्वपूर्ण धातुओं के दामों में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पहली बार दुनिया में अर्थव्यवस्था को लेकर, एक ऐसी अनिश्चय की स्थिति देखने को मिल रही है, जिसके कारण वैश्विक व्यापार में इसका बड़े पैमाने पर असर हो रहा है। दूसरी बार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने। उसके बाद से डॉलर मुद्रा को लेकर एक अलग तरह की चुनौती देखने को मिल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही सारी दुनिया के देशों पर टैरिफ लगाकर वैश्विक व्यापार को बड़ी चुनौती देने का काम किया। 1993 में लागू वैश्विक व्यापार संधि के बाद जिस तरह से दुनिया के देशों के बीच सुगमता से व्यापार हो रहा था। वैश्विक व्यापार संधि को लेकर दुनिया के देशों का विश्वास, वैश्विक लेन-देन पर बना था। डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ के जरिए सभी देशों को उसे चुनौती देने का काम किया। जिसके कारण वैश्विक व्यापार को लेकर कई चुनौतियां सारी दुनिया के देशों में बढ़ी। इजराइल-फिलिस्तीन तथा रूस और यूक्रेन का युद्ध लंबे समय तक चलने से सारी दुनिया के देशों में चुनौतियां बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की दादागिरी, रूस की मुद्रा जप्त करने, रूस ईरान और अन्य देशों पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगा देने से दुनिया के देशों का अमेरिका के ऊपर विश्वास घटा है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा जिस तरह से ईरान को निशाने पर लिया गया, ईरान के अधिकांश नेताओं को घोषित रूप से मारा गया। ईरान में सत्ता पलटाने की कोशिश अमेरिका द्वारा की गई। इसका असर अब सारी दुनिया में देखने को मिल रहा है। पिछले 1 वर्ष में सोने और चांदी के कारोबार को लेकर बड़े पैमाने पर तेजी और गिरावट का दौर देखने को मिला है। पहली बार अमेरिकी डॉलर को वैश्विक स्तर पर चुनौती मिली है। ब्रिक्स के देशों ने आपसी व्यापार के लिए अन्य मुद्राओं में व्यापार करने तथा डॉलर की अहमियत को कम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। वैश्विक मुद्रा में सोने का महत्वपूर्ण आधार हमेशा से रहा है। 2008 के बाद जब विश्व बैंक ने सभी फेडरल बैंकों को सोने का स्टॉक बढ़ाने का सुझाव दिया था। उसके बाद से दुनिया के सभी देशों ने सोने का भंडारण बड़ी मात्रा में शुरू कर दिया था। जिसके कारण 2008 के बाद से लगातार विश्व स्तर पर सोने के दाम बढ़ते रहे। अभी भी सोना मुद्रा के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकार वैश्विक मुद्रा है। भारत में पिछले 1 साल में 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की न्यूनतम कीमत 68000 थी। 1 अप्रैल 2025 में सोने की कीमत 91190 तथा 20 मार्च 2026 को 155000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है। इसी तरह 1 अप्रैल 2025 को चांदी की कीमत 103900 प्रति किलो थी। जो 20 मार्च 2026 को 2.31 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई। पिछले 1 साल में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि और गिरावट का यह दौर देखने को मिल रहा है। वर्तमान में जब सारी दुनिया के देशों में अमेरिका-इजराइल और ईरान के युद्ध कारण आग लगी हुई है। ऐसे समय में सोने और चांदी की कीमतों में हाल ही में गिरावट देखने को मिल रही है। जिसको लेकर अनिश्चय की स्थिति देखने को मिल रही है। सारी दुनिया के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले 20 दिनों में शेयर बाजार में लगभग 26 फ़ीसदी की गिरावट देखने को मिली है। भारत सहित अमेरिका, जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस तथा ब्रिटेन के शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इसमें सबसे बड़ी गिरावट भारत, जापान और जर्मनी के शेयर बाजारों में देखने को मिल रही है। कच्चे तेल और गैस के दाम बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। शेयर बाजार की गिरावट और वित्तीय अस्थिरता का असर बैंकों और वित्तीय संस्थानों में भी स्पष्ट रूप से पड़ रहा है। 2008 में जो अमेरिका की आर्थिक स्थिति थी, वही स्थिति अब दुनियाभर के देशों में बनती हुई दिख रही है। जिसके कारण बैंकों और वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने का खतरा भी बढ़ने लगा है। इसी बीच सोने और चांदी की कीमत जो हमेशा युद्ध के समय पर तेज होती हैं, उनमें भी गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है। जिसके कारण लोगों में घबराहट है। पिछले एक वर्ष में सोने और चांदी के दाम बड़ी तेजी के साथ घटे और बढ़े थे। शेयर बाजार और बैंकों से पैसा निकालकर लोग सोने चांदी में निवेश करके मुनाफा वसूली कर रहे हैं। जिसके कारण सोने चांदी के दामों में शेयर बाजार की तरह ही उतार-चड़ाव देखने को मिल रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है जिस तरह की स्थिति वर्तमान में बनी हुई है, उसमें सोना-चांदी एवं कीमती धातुएं, मुद्रा के रूप में वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य होंगी। युद्ध के इस दौर में जब बड़ी-बड़ी महाशक्तियां इसमें शामिल हैं, इसको देखते हुए मुद्रा के रूप में सोने और चांदी की कीमतें जैसे ही युद्ध की स्थिति में स्थिरता आएगी। उसमें सबसे ज्यादा कीमत सोना की होगी। सोना को हमेशा से मुद्रा के रूप में सारी दुनिया स्वीकार करती रही है। आगे भी करती रहेगी। सोना ही सबसे विश्वसनीय मुद्रा सारी दुनिया में मानी जाती है। सोने और चांदी के दामों में गिरावट मुनाफा वसूली के कारण है। इनके दाम भविष्य में भी बढ़ते रहेंगे, ऐसा आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है। ईएमएस / 20 मार्च 26