गुजरात में अचानक बदले मौसम ने आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। गुरुवार को राज्य के अनेक जिलों में तेज हवाओं, धूल भरी आंधियों, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने ऐसा रूप लिया कि कई स्थानों पर हालात किसी छोटे तूफान जैसे प्रतीत हुए। इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन ने जहां लोगों को गर्मी से कुछ राहत दी, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी रबी फसलों के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं रहा। विशेष रूप से उस समय जब गेहूं, चना, जीरा और सौंफ जैसी फसलें कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी थीं, इस तरह की बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा बढ़ा दिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में दर्ज की गई वर्षा ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौसम ने व्यापक रूप से असर डाला है। अमरेली जिले की बगसरा तहसील में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि सुरेंद्रनगर के चोटीला, राजकोट शहर और जूनागढ़ की भैंसाण तहसील में भी लगभग डेढ़ इंच तक पानी गिरा। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा हुई। दिनभर में कुल बहत्तर तहसीलों में वर्षा दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यह बदलाव केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में इसका प्रभाव दिखाई दिया। राजकोट में तो स्थिति और भी गंभीर रही, जहां केवल एक घंटे की तेज बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, होर्डिंग्स गिर गए और कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। इसी प्रकार जामनगर में धूल भरी आंधी के कारण दृश्यता कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी कठिनाई हुई। कई जगहों पर सौर ऊर्जा पैनल उड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे संपत्ति का नुकसान भी हुआ। पाटण जिले के सांतलपुर और समी क्षेत्रों में तूफानी हवाओं ने भारी तबाही मचाई। कई मकानों के छप्पर उड़ गए और दीवारें गिर गईं, जिससे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। छोटे रण क्षेत्र में रहने वाले अगरिया समुदाय को भी बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि नमक उत्पादन प्रभावित हुआ और सौर ऊर्जा उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। यह केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन और आजीविका पर सीधा प्रहार है जो पहले से ही सीमित संसाधनों के सहारे जीवन यापन करते हैं। महेसाणा, वडोदरा और जूनागढ़ सहित अन्य जिलों में भी तेज हवाओं और बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई स्थानों पर ओलावृष्टि की भी खबरें सामने आईं, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका और बढ़ गई है। ओले गिरने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार साबित होती है।एक ओर उत्पादन घटता है और दूसरी ओर आय भी कम हो जाती है। मौसम विभाग के अनुसार इस अचानक बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण की भूमिका है। इन कारणों से राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश और आंधी की स्थिति बनी। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले चौबीस घंटों तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है और कुछ क्षेत्रों में इक्कीस मार्च तक बेमौसम बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से बनासकांठा, पाटण, साबरकांठा, कच्छ और दक्षिण गुजरात के क्षेत्रों में इस प्रकार की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई गई है। किसानों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा होता है। महीनों की मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तभी इस तरह का मौसम उनकी सारी उम्मीदों को झटका दे देता है। बारिश के कारण कटाई में देरी होती है, फसल भीग जाती है और कई बार पूरी तरह खराब हो जाती है। इसके अलावा तेज हवाओं से फसलें गिर जाती हैं, जिससे कटाई और भी कठिन हो जाती है। इससे उत्पादन में कमी आती है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मौसम परिवर्तन अब पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकते हैं। बदलते मौसम के इस स्वरूप ने खेती को पहले से अधिक जोखिम भरा बना दिया है। ऐसे में किसानों को नई तकनीकों और सावधानियों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि वे इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। कृषि विभाग ने भी किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं और मौसम की जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखें। प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की है। आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस तरह की प्राकृतिक घटनाओं के सामने मानव प्रयास सीमित ही साबित होते हैं, लेकिन समय पर चेतावनी और सावधानी से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। यह बेमौसम बारिश और आंधी केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि मौसम का स्वरूप बदल रहा है और इसके प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं। किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि इसी प्रकार का मौसम बार-बार होता रहा, तो उनकी आय और जीवन दोनों पर इसका गहरा असर पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएं। अंततः कहा जा सकता है कि गुजरात में आया यह मौसम परिवर्तन केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपने पर्यावरण और कृषि प्रणाली को अधिक मजबूत और अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठाने होंगे। किसानों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है, क्योंकि वही हमारे अन्नदाता हैं और उनकी समृद्धि में ही पूरे समाज की समृद्धि निहित है। (L 103 जलवन्त टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रोड नियर नन्दालय हवेली सूरत मो 99749 40324 वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) ईएमएस / 20 मार्च 26