अंतर्राष्ट्रीय
20-Mar-2026


ईरान की जमीन पर 2500 सैनिक भेजेगा अमेरिका वाशिंगटन(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अब बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने या वहां समुद्री नाकाबंदी करने की योजना पर विचार कर रही है। इसी योजना के तहत करीब 2500 मरीन सैनिकों की एक टुकड़ी जल्द ही इलाके में पहुंचने वाली है। खर्ग आइलैंड ईरान के तट से करीब 15 मील दूर है। यहां से ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर भेजा जाता है। अमेरिका का मानना है कि अगर इस आइलैंड को अपने नियंत्रण में लिया जाए या यहां दबाव बनाया जाए, तो ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इस समय ईरान ने इस स्ट्रेट से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों को रोक रखा है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है, जहां से लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। इसी कारण पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। क्या है खर्ग कब्जे का प्लान? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में इजाफा हो रहा है। अमेरिकी मीडिया एक्सियोस के मुताबिक, अमेरिका तुरंत खर्ग आइलैंड पर कब्जा नहीं करेगा। पहले वह ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना चाहता है। इसके लिए अगले करीब एक महीने तक हवाई हमले जारी रखे जा सकते हैं। हाल ही में अमेरिका ने खर्ग आइलैंड पर कई बड़े एयरस्ट्राइक भी किए हैं, ताकि ईरान को चेतावनी दी जा सके। सूत्रों के मुताबिक, 2500 सैनिकों के अलावा दो और मरीन यूनिट्स भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं, जिनमें हर एक में लगभग इतने ही जवान होंगे। व्हाइट हाउस और पेंटागन और ज्यादा सैनिक भेजने पर भी विचार कर रहे हैं, लेकिन इसे लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ट्रंप के सामने जमीनी हमले का भी विकल्प अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप हर विकल्प खुला रखना चाहते हैं। जरूरत पडऩे पर जमीनी हमला भी किया जा सकता है। हालांकि कुछ एक्सपट्र्स इसे खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि ईरान झुक जाए, क्योंकि वह दूसरी जगहों से तेल सप्लाई रोक सकता है। एक और विकल्प यह है कि अमेरिका अपनी नौसेना और विमानों को तैनात कर टैंकरों को सुरक्षा दे, ताकि बिना जमीन पर कब्जा किए ही रास्ता खोला जा सके। इस पूरे तनाव के कारण ट्रंप को अपनी चीन यात्रा भी टालनी पड़ी है। अमेरिका इस मुद्दे पर जल्दी पीछे हटने के मूड में नहीं है और हर संभव तरीका अपनाने पर विचार कर रहा है। विनोद उपाध्याय / 20 मार्च, 2026