ट्रेंडिंग
20-Mar-2026
...


एलपीजी की पैनिक बुकिंग घटी, लेकिन हालात चिंताजनक, हर दिन 55 लाख सिलेंडर की मांग, सरकार की अपील... वैकल्पिक व्यवस्था तलाशे जनता कच्चे तेल की मार...तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के बढ़ाए दाम, इंडस्ट्रियल यूल की कीमत 25 प्रतिशत बढ़ी नई दिल्ली (ईएमएस)। इजरायल-ईरान युद्ध को 20 दिन पूरे हो गए हैं, इस दौरान होर्मूज स्ट्रेट से क्रूड और गैस के 9 जहाज ही गुजरे हैं। ऐसे में दुनिया के साथ भारत में भी एलपीजी गैस की कमी बनी हुई है, ऐसे में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि एलपीजी की स्थिति अभी भी गंभीर है, सरकार आपूर्ति करने की कोशिश कर रही है। सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं तक 100त्न एलपीजी पहुंचाई जा रही है। हालांकि हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। पैनिक बुकिंग में कमी आई है, लेकिन लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के हिसाब से ही गैस बुक करें। सरकार ने साफ कहा है कि एलपीजी की स्थिति अभी भी गंभीर है। सप्लाई बनाए रखने की कोशिश जारी है, लेकिन आम लोगों से अनुरोध है कि वे वैकल्पिक ईंधन के विकल्पों पर भी विचार करें और घबराहट में खरीदारी से बचें। वहीं कच्चे तेल की मार के कारण तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम में 2.35 रूपए प्रति लीटर की वृद्धि की है, वहीं इंडस्ट्रियल यूल की कीमत भी 25 प्रतिशत बढ़ी है। एलपीजी संकट को लेकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अब पैनिक बुकिंग में कमी आई है। देशभर में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन हालात अभी भी चिंता वाले बने हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 19 मार्च को करीब 55 लाख सिलेंडर की बुकिंग हुई। वहीं, करीब 7500 उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी में शि ट हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से ये बातें केंद्रीय मंत्रालयों की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान से 913 भारतीय आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते वापस लौट रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में 4500 छापे मारे गए। इनमें से 1100 छापे उत्तर प्रदेश में हुए। वहीं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1800 सरप्राइज इंस्पेक्शन भी किए। सुजाता शर्मा ने कहा कि पिछले एक ह ते में करीब 11,300 टन कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को दी गई है और 18 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इसका आवंटन किया गया है। सरकार ने निगरानी बढ़ाने के लिए 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कंट्रोल रूम और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटियां बनाई हैं। देश में प्रीमियम पेट्रोल 2.35 रुपए महंगा तेल विपणन कंपनियों ने भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे विशेष ईंधन का उपयोग करने वाले ग्राहकों पर असर पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च 2026 से प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में दो रुपये से लेकर 2.35 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है। पुणे में नई कीमतों के अनुसार, स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल के दाम में 2.09 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पहले इस पेट्रोल का भाव 111.68 रुपये प्रति लीटर था, जो अब बढक़र 113.77 रुपये प्रति लीटर हो गया है। हालांकि, सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। औद्योगिक डीजल 22 रुपए महंगा औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल की दरें भी बढ़ाई गईं। इंडियन ऑयल ने अपने इंडस्ट्रियल यूल की कीमत में भी करीब 22 या 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके दाम 87.67 प्रति लीटर से बढक़र अब 109.59 प्रति लीटर हो गए हैं। इंडस्ट्रियल यूल का उपयोग फैक्ट्रियों में बॉयलरों और पावर प्लांट्स में ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है। इसमें मु य रूप से फर्नेस ऑयल, लाइट डीजल ऑयल और हाई-स्पीड डीजल शामिल हैं। ये मशीनों को चलाने, धातुओं को पिघलाने और औद्योगिक हीटिंग के काम आते हैं। तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में यह इजाफा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बाद किया है। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रीमियम श्रेणी कुल पेट्रोल बिक्री का केवल दो से चार फीसदी है। सरकार आम आदमी पर कोई मूल्य वृद्धि का बोझ नहीं डालना चाहती है। तेल कंपनियां स्वतंत्र रूप से मूल्य निर्धारण का निर्णय लेती हैं। सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को विनियमित नहीं करती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के औद्योगिक शहरों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। गुजरात के सूरत में गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बड़ी सं या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर एलपीजी गैस की कमी ने छोटे उद्योगों और फैक्ट्रियों पर भी असर डाला है। एलपीजी गैस की कमी के चलते कई फैक्ट्रियां अस्थायी रूप से बंद हो रही हैं। मजदूरों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रवासी मजदूर सचिन ने बताया कि हम गांव जा रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ दिनों से गैस नहीं मिल रही है। हमारी कंपनियां भी बंद हो रही हैं। इसलिए क्या करें, भूखे मर रहे तो वापस गांव जा रहे हैं। हमारे पास पैसे नहीं हैं इसलिए वापस लौट रहे हैं। कोशिश की गैस पाने की, लेकिन सब अपना-अपना देखते हैं। यहां कोई मदद नहीं कर रहा गैस सप्लाई शुरू होने पर ही लौटेंगे। बहुत लोग वापस जा रहे हैं। सचिन ने आगे बताया कि 4-5 दिनों से ज्यादा परेशानी हो रही है। 500 रुपये लीटर गैस मिल रही है और पैसे भी नहीं हैं। इसलिए गांव जा रहे हैं। वहीं प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने कहा कि गैस की समस्या के कारण मैं अपने गांव लौट रही हूं। हमारे खाते बंद हो रहे हैं और पैसे भी नहीं हैं। जो भी मजदूरी करते हैं और 500-1000 रुपये उसमें डालते हैं, वो भी नहीं मिल रहे और गैस भी नहीं मिल रही। यह पूछने पर कि गैस कब से नहीं मिल रही, सीमा देवी ने कहा कि पिछले 15 दिनों से गैस नहीं मिल रही। एक ह ते पहले गैस खत्म हो गई थी फिर गैस की कमी हो गई। सीमा देवी का कहना है कि एजेंसी पर भी गए लेकिन अभी तक गैस नहीं मिली। मैं और मेरी बेटी जा रहे हैं जबकि पति और दो बच्चे यहीं रहेंगे। छोटे सिलेंडर तक नहीं मिल रहे हैं। एलपीजी की किल्लत से परेशान प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने बताया कि हम उपले लाकर खाना बना रहे हैं। अभी हमारे पास फोन आया कि जो छोटा सिलेंडर चला रहे थे, वो भी खत्म हो गया। गली-गली खोज रहे हैं लेकिन छोटा सिलेंडर भी नहीं मिल रहा। गैस संकट के चलते सूरत में श्रमिकों के पलायन की स्थिति बन गई है जो न केवल स्थानीय उद्योगों के लिए चिंता का विषय है। बल्कि यह दिखाता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर भी गहराई से पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की कमी की खबरें आई। इस बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को एक खास प्रस्ताव दिया है। केंद्र ने राज्यों से पाइप वाली नेचुरल गैस की पहुंच और कवरेज के विस्तार में तेज़ी लाने में मदद करने की अपील की है। केंद्र ने कहा कि अगर राज्य ऐसा करते हैं तो उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह प्रोत्साहन उन्हें कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी की अतिरिक्त मात्रा आवंटित करके दिया जाएगा। यानी जितनी जिस राज्य की मांग है, उसे 20 फीसदी अधिक दिया जाएगा।