- आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की नई रणनीति - नागर की एंट्री से धार्मिक-सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। झाबुआ के प्रसिद्ध कथा वाचक मोहित नागर ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई। कांग्रेस में शामिल होने के बाद मोहित नागर ने आदिवासी समाज को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सनातन का अनुयायी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे अब तक 10 से 15 हजार आदिवासियों को दीक्षा दे चुके हैं और आदिवासी क्षेत्रों में नियमित रूप से भागवत कथाएं करते हैं। उन्होंने अपने बयान में रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे माता शबरी ने भगवान राम का इंतजार किया, वैसे ही आदिवासी समाज की आस्था भी गहरी और जुड़ी हुई है। राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को कांग्रेस की एक सुनियोजित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए धार्मिक और सामाजिक प्रभाव वाले चेहरों को साथ जोड़ रही है। मोहित नागर का प्रभाव खासतौर पर झाबुआ, अलीराजपुर, डिंडोरी और आगर मालवा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में माना जाता है, जहां वे लंबे समय से धार्मिक आयोजनों के जरिए सक्रिय रहे हैं। चुनाव में प्रभाव बनाने के लिए तैयार की जा रही भूमिका सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत की जा सकती है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां आदिवासी मतदाता चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस के मौजूदा विधायकों को आगामी चुनाव में मदद मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि भैरव बापू सिंह ने जीतू पटवारी से मुलाकात कर उन्हें कांग्रेस में शामिल कराया है। चुनाव में कितना असर दिखाएगी रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, जिसमें कांग्रेस आदिवासी वर्ग को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस रणनीति का चुनावी मैदान में कितना असर पड़ता है और क्या यह कांग्रेस को अपेक्षित लाभ दिला पाती है।