वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को लेकर दो विरोधाभासी बयान दिए हैं, जो अमेरिका की रणनीति में अस्थिरता को दिखाते हैं। पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान के साथ युद्ध में सीजफायर नहीं चाहते और वर्तमान सैन्य स्थिति में संघर्ष-विराम की कोई योजना नहीं है। उनका कहना था कि अमेरिका युद्ध में मजबूत स्थिति में है और ईरान को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान की सेना लगभग समाप्त हो चुकी है, इसलिए अभी रुकना सही नहीं होगा। लेकिन केवल एक घंटे बाद ही उनका रुख बदल गया। ट्रंप ने कहा कि अब युद्ध को समाप्त करना चाहिए। उनका कहना था कि अमेरिका अपने उद्देश्यों को हासिल करने के करीब पहुंच चुका है और इसकारण मिलिट्री कार्रवाई को कम करने पर विचार हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अब उन देशों की जिम्मेदारी होगी, जो इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, न कि अमेरिका की। अगर आवश्यक हुआ, तब अमेरिका मदद कर सकता है, लेकिन ईरान खतरा समाप्त होने के बाद इसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच यह युद्ध 28 फरवरी से जारी है। उस दिन अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई और न्यूक्लियर ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने काउंटर अटैक किए, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और तेल की कीमतें बढ़ने लगीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के विरोधाभासी बयान अमेरिका की रणनीतिक अनिर्णय को दर्शाते हैं। पहले उन्होंने ईरान को बिना शर्त हार मानने के लिए कहा था, लेकिन कुछ ही समय बाद युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह यूटर्न अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए अप्रत्याशित और जटिल स्थिति पैदा कर रहा है। इस तरह, ट्रंप का हालिया रुख युद्ध की दिशा और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता पैदा करता है। अंततः यह स्पष्ट है कि अमेरिका फिलहाल ईरान युद्ध में बीच-मझधार में फंसा हुआ है, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान अमेरिका की नीति में अस्थिरता और द्विविधा को उजागर करते हैं। आशीष/ईएमएस 22 मार्च 2026