यरूशलेम(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग का मैदान छोड़कर भाग गए हैं। पहले दिन ट्रंप ने दमदारी से कहा था कि अमेरिका ओर इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया है। फिर 24वें दिन बोले अब अमेरिका 5 दिन तक ईरान पर हमला नहीं करेगा। तभी इजराइली पीएम ने ऐलान करते हुए कहा कि हम ये जंग लड़ेंगे और जीतेंगे। उन्होंने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई महत्वपूर्ण चर्चा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेता एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जो इजरायल के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए युद्ध के लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। हालांकि, इस बातचीत के बावजूद नेतन्याहू ने ईरान और लेबनान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का अपना संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य उपलब्धियों को एक ठोस समझौते में बदलने के पक्ष में हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लक्षित करना जारी रखेगी। उन्होंने खुलासा किया कि हाल ही में इजरायली अभियानों में दो और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को ढेर किया गया है और हिजबुल्लाह के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। उनका संदेश स्पष्ट है कि जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, इजरायल अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य दबाव कम नहीं करेगा। इसी बीच, वाशिंगटन से एक राहत भरी खबर आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने अमेरिकी सैन्य विभाग को ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता समाप्त करने को लेकर सकारात्मक और उत्पादक बातचीत शुरू हुई है और यह स्थगन इन्हीं चर्चाओं की प्रगति पर निर्भर करेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में है और तेल की बढ़ती कीमतों सहित वैश्विक हवाई मार्गों पर मंडराते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी हलचल तेज है। बहरीन ने एक नया मसौदा प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देने की वकालत की गई है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बलों को नेविगेशन बाधित करने वाले तत्वों के खिलाफ संबंधित देशों के क्षेत्रीय जल के भीतर भी सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति को देखते हुए इस प्रस्ताव के भविष्य पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। आने वाले पांच दिन क्षेत्र में शांति की स्थापना या युद्ध के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026