- साइबर धोखाधड़ी से निपटने को अहमदाबाद में कार्यशाला - गुजरात के 94 सहकारी बैंकों के शीर्ष अधिकारी शामिल, “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसे बढ़ते साइबर अपराधों पर सतर्कता और मजबूत सुरक्षा ढांचे पर जोर अहमदाबाद (ईएमएस)| रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा विनियमित संस्थाओं के साथ चल रहे पर्यवेक्षण एवं विकास संवाद के हिस्से के रूप में, साइबर-सक्षम धोखाधड़ी की घटनाओं एवं उनकी बढ़ती परिष्कृतता के प्रति जागरूकता पैदा करने हेतु, 23 मार्च 2026 को आरबीआई अहमदाबाद ने साइबर आधारित धोखाधड़ी से निपटने पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। विनियमित संस्थाओं में साइबर आधारित धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए चल रही श्रृंखला में, 25 फरवरी 2026 को 100 छोटे शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए पहली कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस दूसरी कार्यशाला में गुजरात भर में कार्यरत 94 शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) एवं राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, वरिष्ठ प्रबंधन एवं आईटी नेताओं ने भाग लिया। ये कार्यशालाएं साइबर धोखाधड़ी के खतरे का मुकाबला करते हुए सुरक्षित डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के साथ आरबीआई की निरंतर प्रयासों का हिस्सा हैं। कार्यशाला में आरबीआई एवं सहकारी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। प्रमुख वक्ताओं में विजय रैना, महाप्रबंधक, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया एवं संजय कुमार केशवाला, पुलिस अधीक्षक, साइबर उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर शामिल थे। कार्यशाला ने साइबर-सक्षम धोखाधड़ी की रोकथाम एवं न्यूनीकरण हेतु मजबूत संरचना एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था, मजबूत आंतरिक नियंत्रण, सुविचारित प्रक्रियाओं एवं उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग की महत्ता पर प्रकाश डाला। आरबीआई के वक्ताओं ने साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी में हालिया वृद्धि, विशेष रूप से डिजिटल गिरफ्तारी घटनाओं पर जोर दिया। उन्होंने ऑनबोर्डिंग के दौरान ग्राहक की उचित जाँच एवं निरंतर लेन-देन निगरानी बनाए रखने की महत्ता पर बल दिया। आरबीआई ने यूसीबी के वरिष्ठ नेतृत्व से अपनी संस्थाओं में साइबर सुरक्षा को मूलभूत रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में लेने का आह्वान किया तथा लोकल सामुदायिक अभियानों, स्थानीय भाषा अलर्ट आदि के माध्यम से जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। केशवाला ने गुजरात पुलिस के साइबर उत्कृष्टता केंद्र की पहलों को प्रदर्शित किया जो साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम, रिपोर्टिंग एवं जांच पर केंद्रित हैं। अपने सत्र में केशवाला ने भारत में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 की संरचना एवं कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया तथा बैंकों द्वारा समय पर कार्रवाई से साइबर धोखाधड़ी पीड़ितों को उनका धन वापस दिलाने में कैसे मदद मिल सकती है, इस पर प्रकाश डाला। श्री केशवाला ने बताया कि साइबर धोखेबाज विश्वास, भय, लोभ, तात्कालिकता एवं आलस्य जैसी मानवीय भावनाओं का शोषण करते हैं तथा गोल्डन आवर के अंदर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग पर बल दिया। कार्यक्रम एक खुले संवाद सत्र के साथ समाप्त हुआ जिसमें विभिन्न बैंकों के प्रतिभागियों ने मार्गदर्शन मांगा तथा साइबर धोखाधड़ी को प्रतिबंधित करने के कुछ तरीके भी सुझाए। आरबीआई ने बैंकों एवं अन्य हितधारकों के साथ निरंतर संलग्नता तथा भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं अखंडता को और मजबूत करने हेतु उचित उपाय करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। सतीश/23 मार्च