नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल और एलपीजी की कीमतों में अस्थिरता के बाद अब एमआरआई मशीनों के संचालन के लिए अनिवार्य मानी जाने वाली हीलियम गैस की सप्लाई चेन बाधित होने की खबरें आ रही हैं। दरअसल, ईरान द्वारा कतर के रास लफान संयंत्र पर किए गए हमले के बाद वहां से हीलियम का उत्पादन और निर्यात प्रभावित हुआ है। भारत अपनी हीलियम संबंधी जरूरतों का 100 प्रतिशत आयात कतर से ही करता है, ऐसे में इस महत्वपूर्ण गैस की कमी भारतीय अस्पतालों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है। हीलियम एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसका तरल रूप एमआरआई मशीनों के भीतर लगे शक्तिशाली सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए कूलेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि इसका बॉइलिंग पॉइंट शून्य से 269 डिग्री सेल्सियस नीचे होता है, इसलिए यह मशीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनिवार्य है। यदि इसकी आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो पुरानी तकनीक वाली एमआरआई मशीनें बंद हो सकती हैं, जिन्हें सालाना गैस रिफिलिंग की आवश्यकता होती है। राहत की बात यह है कि राजधानी दिल्ली के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों जैसे एम्स और अन्य बड़े केंद्रों में फिलहाल सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक वाली नई एमआरआई मशीनें अब हीलियम-फ्री या कम गैस खपत वाली हैं, जिनमें केवल स्थापना के समय ही गैस की जरूरत पड़ती है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के मुफ्त एमआरआई सेंटर के अनुसार, उनकी मशीनें नवीनतम तकनीक पर आधारित हैं, इसलिए मरीजों को फिलहाल कोई असुविधा नहीं हो रही है। हालांकि, कुछ निजी स्कैन केंद्रों ने चिंता जताई है कि हीलियम की कमी की अफवाहों के बीच इसके दाम दोगुने हो गए हैं, जिससे आने वाले समय में एमआरआई स्कैन के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। वर्तमान में भारत के 60 प्रतिशत से अधिक एमआरआई सिस्टम ऐसी तकनीक पर आधारित हैं जिन्हें बहुत कम रखरखाव और गैस की जरूरत पड़ती है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुला और युद्ध लंबा खिंचा, तो सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा सकती है। ऐसी स्थिति में मरीजों के लिए डायग्नोस्टिक सेवाओं की लागत 15,000 रुपये तक बढ़ सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य जगत की नजरें मध्य पूर्व के हालातों पर टिकी हुई हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026