24-Mar-2026
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- देशी फ्रिज की दी जाती है संज्ञा - चैत्र नवरात्रा में लगने वाले माता मेलों में इन मिट्टी के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है शिवपुरी (ईएमएस)। शिवपुरी जिले में इस समय चैत्र नवरात्रा में माता मेलों का दौर जारी है। इन मेलों में मिट्टी के बर्तन बेचने के लिए इनके निर्माण कारीगरों ने अपनी दुकानें लगाई हैं। इन मेलों में मिट्टी के बर्तन के बर्तन बिक रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में मिट्टी के मटकों, सुराहियों, घड़ों की मांग बढ़ने लगी है। ठंडा, प्राकृतिक पानी पीने के लिए लोग फिर पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे हैं। देशी फ्रिज की दी जा है संज्ञा- माता मेलों में मिट्टी के बर्तन बेचने के आए निर्माणकर्ता कारीगरों की दुकानों पर जगह-जगह मटके, सुराहियां सजी दिख रही हैं। चैत्र नवरात्रा में माता मेला में इन्हें खरीदने के लिए लोगों की भीड़ भी नजर आ रही है। मटके बेचने वाले कारीगरों ने बताया कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, मिट्टी के बर्तनों की बिक्री भी बढ़ती है। कारीगरों ने बताया कि फ्रिज के पानी मुकाबले मटके का पानी ज्यादा ठंडा, मीठा, प्राकृतिक होता है। इसी वजह से गर्मी में बड़ी संख्या में लोग मटके का के उपयोग पसंद करते हैं। कारीगरों का कहना है कि मिट्टी से बने बर्तन खासकर मटके व सुराहियों को देशी फ्रिज की संज्ञा दी जाती है। मिट्टी के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है - शिवपुरी में इस समय चैत्र नवरात्रा में लगने वाले माता मेलों मेलों, जैसे बलारपुर माता मेला, राजेश्वरी माता मेला, कैला देवी माता मंदिर के मेलों में मिट्टी के बर्तनों की भारी मांग रहती है। इन्हें खरीदना शुभ माना जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई सालों से यह परंपरा चली आ रही है जब हमारे बुर्जुग लोग इन्हें माता मेलों से यह मिट्टी के बर्तन खरीदते हैं। विशेषकर माता के मेलों में मटके और अन्य मिट्टी के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है और यह परंपरा अभी भी कायम है। पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है- स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तन में रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। इसमें मौजूद खनिज तत्व शरीर के लिए लाभदायक माने जाते हैं। यह पानी पाचन क्रिया बेहतर करने में भी सहायक होता है। मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इसलिए प्लास्टिक, अन्य कृत्रिम साधनों की तुलना में इन्हें बेहतर विकल्प माना जाता है। गर्मी में ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में मटके का उपयोग परंपरा के रूप में जारी है। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलता है। ईएमएस / 24 मार्च 26