नई दिल्ली,(ईएमएस)। जनता दल यूनाइटेड के भीतर मचे आंतरिक घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। बांका से जेडीयू सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता पर तलवार लटकती नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि उनके खिलाफ किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी के संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत ने मोर्चा खोला है। कामैत ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर गिरधारी यादव को अयोग्य ठहराने की गुजारिश की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, गिरधारी यादव पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लग रहे हैं। अनुशासन का यह मामला तब और गंभीर हो गया जब उनके बयानों को पार्टी की नीति के खिलाफ पाया गया। दरअसल, पिछले साल जेडीयू ने उन्हें एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। यह नोटिस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर उनके द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों के बाद दिया गया था। गिरधारी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि यदि लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट सही थी, तो विधानसभा चुनाव के लिए इसमें बदलाव की क्या आवश्यकता है? उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा था, क्या मैं गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुआ हूं? इसके अलावा, उन्होंने बाढ़ और कृषि कार्यों के समय इस प्रक्रिया को चलाने के लिए आयोग की आलोचना की थी। पार्टी का मानना है कि इन बयानों ने जेडीयू की छवि को नुकसान पहुँचाया, क्योंकि पार्टी हमेशा से चुनाव आयोग की निष्पक्षता का समर्थन करती आई है। सांसद गिरधारी यादव की मुश्किलें केवल उनके बयानों तक सीमित नहीं हैं। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश की राजनीतिक गतिविधियों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। लंदन से शिक्षित चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार मनोज यादव के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। बेलहर सीट, जहाँ से गिरधारी यादव स्वयं दो बार विधायक रह चुके हैं, वहाँ उनके बेटे का विपक्षी खेमे से चुनाव लड़ना पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरा। यद्यपि चाणक्य प्रकाश को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस घटनाक्रम ने गिरधारी यादव की पार्टी के प्रति निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि लोकसभा स्पीकर इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और जेडीयू अपने बागी तेवर दिखा रहे सांसद पर क्या अंतिम कार्रवाई करती है। वीरेंद्र/ईएमएस/25मार्च2026