लेख
25-Mar-2026
...


भारत में वर्तमान में 8 केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ अकेला है जिसे “सिटी ब्यूटीफुल” कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह है कि यह देश का एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है जो देश के पंजाब और हरियाणा जैसे दो समृद्ध राज्यों की संयुक्त राजधानी है। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़ न केवल एक शहर है, बल्कि यह एक स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश भी है, जो सीधे केंद्र सरकार के अधीन आता है। इसकी स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यह है कि 1947 के भारत विभाजन के बाद जब पूर्वी पंजाब की पुरानी राजधानी लाहौर पाकिस्तान में चली गयी तो भारतीय पंजाब को एक नई राजधानी की ज़रूरत महसूस हुई।उसी समय 1950 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की दूरदर्शिता के परिणाम स्वरूप चंडीगढ़ को आधुनिक भारत के पहले व पूर्णतः नियोजित शहर के रूप में पंजाब की नई राजधानी के तौर पर इसे बनाया गया। इसे विश्व प्रसिद्ध स्विस-फ्रेंच वास्तुकार ले कोर्बुजिए ने डिज़ाइन किया था। बाद में जब 1 नवंबर 1966 को पंजाब राज्य को भाषाई आधार पर विभाजित कर हरियाणा बनाया गया उस समय चंडीगढ़ को दोनों राज्यों के बीच विवाद से बचने के लिए केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया और इसे दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बना दिया गया। आज भी दोनों प्रदेशों की राजधानी होने के बावजूद चंडीगढ़ न तो पूरी तरह पंजाब का है और न हरियाणा का बल्कि यह पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित है। लगभग 50 आयताकार सेक्टरों में बांटा गये इस चंडीगढ़ में चौड़ी सड़कें, हरियाली, पार्क और आधुनिक इमारतें हैं। यहाँ कैपिटल कॉम्प्लेक्स के रूप में विधानसभा, सचिवालय व उच्च न्यायालय हैं। यहाँ विद्युत ,जल निकासी,नाले नालियां सभी भूमिगत हैं। यह शहर यूनेस्को की भी विश्व धरोहर है।यहाँ स्थित रॉक गार्डन, सुखना झील, रोज़ गार्डन आदि जगहें इसे पर्यटन स्थल के रूप में पहचान देती हैं। भारत के अन्य शहरों की तुलना में यहां जनघनत्व कम, सड़कें व्यवस्थित और प्रदूषण नियंत्रित होने का दावा किया जाता है। यह भारत में मानव विकास सूचकांक और जीवन की गुणवत्ता में भी शीर्ष पर है। यह “पेंशनर्स पैराडाइज़” भी कहलाता है क्योंकि यहां शांत वातावरण, अच्छी सुविधाएं और उच्च जीवन स्तर है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में यह दूसरे नंबर पर था । आवासीय क्षेत्र, बाज़ार , जल निकासी और सार्वजनिक शौचालयों के मामले में भी यह सबसे साफ़ केंद्र शासित प्रदेश गिना जाता है। परन्तु इसी चमचमाते चंडीगढ़ का एक दूसरा पहलू भी है जो कि अत्यंत दुखद,शर्मनाक व चंडीगढ़ जैसे सुनियोजित शहर की सुंदरता व इस पर लगे “सिटी ब्यूटीफ़ुल ” के लेबल पर सवाल खड़ा करने वाला है। मिसाल के तौर पर निश्चित रूप से यहाँ के अधिकांश मुख्य मार्ग साफ़ सुथरे हैं परन्तु जब आप चंडीगढ़ के घनी आबादी वाले रिहाइशी इलाक़ों से गुज़रें तो आप को पता चलेगा कि चंडीगढ़ की एक बड़ी मध्यम व निम्न मध्यम वर्गीय आबादी किस तरह रहती है। उदाहरण के तौर पर चंडीगढ़ में हेलो माजरा,राम दरबार कालोनी व डड्डू माजरा जैसे अनेक इलाक़े ऐसे हैं जहाँ सड़कें ख़स्ता हाल हैं। गड्ढे हैं ,जगह जगह कूड़ों का ढेर है। गायें व सांडों का झुण्ड जगह जगह घूमता व चौक चौराहों पर डेरा जमाये नज़र आता है। राम दरबार कॉलोनी की टूटी‑फूटी सड़कों, गंदगी, जाम नालियों और ख़राब सफ़ाई ‑प्रबंधन के कारण अपेक्षाकृत चंडीगढ़ के उपेक्षित इलाक़ों में गिने जाते हैं। “राम दरबार वॉर्ड‑19” की एक बड़ी आबादी वाली बस्ती है, जिसकी मूल सुविधाओं की हालत लगातार घटती जा रही है और समस्यायें दोनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। इसी राम दरबार की शान है एक प्राचीन सूफ़ी स्थल दरबार, माता राम बाई जी,अम्मी हुज़ूर। चंडीगढ़ को पहचान देने वाला यह अकेला ऐसा स्थान है जो सर्व धर्म समभाव का मुख्य केंद्र है। इससे सटा हुआ एक सार्वजनिक शौचालय है जोकि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा निर्मित व संचालित है। परन्तु आश्चर्य की बात यह है कि इस शौचालय भवन में बिजली का कनेक्शन कटा हुआ है। इसलिये शौचालय के कर्मचारी ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से इधर उधर से बिजली का तार जोड़कर अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं। इसी शौचालय के कर्मचारी यह भी बताते हैं कि उन्हें ठेकेदार कई कई महीने तक तनख़्वाह नहीं देता। और हद तो यह है कि चंडीगढ़ के इसी सार्वजनिक शौचालय ने गंदिगी,बीमारी व प्रदूषण फैलाने की वह इबारत लिखी है जिसकी दूसरी मिसाल शायद ही कहीं देखने को मिले। लाखों रूपये ख़र्च कर किये गये इस निर्माण में शौचालय की सीवेरज प्रणाली शायद जाम हो गयी है। लिहाज़ा यहाँ के कर्मचारियों ने शौचालय के पीछे व पवित्र दरबार भवन की दिशा में लगभग 20 फ़ुट लंबा एक गहरा व खुला गड्ढा खोद कर उसी से सीवेरज को जोड़ दिया है। परिणामस्वरूप शौचालय की सारी गंदिगी आगे बढ़ने के बजाये उसी गड्ढे में हर वक़्त भरी रहती है और दुर्गन्ध फैलती रहती है। इसी जगह के पास प्रत्येक वृहस्पतिवार को एक विशाल मंडी भी लगती है जिसमें हज़ारों लोग आते जाते हैं। इसी जगह पर कूड़ों का ढेर भी पड़ा रहता है जो आम दिनों में प्रदूषण फैलाता है। परन्तु इंतेहा तो तब हो जाती है जब इन्हीं कूड़े के ढेरों में आग लग जाती है। कई बार अग्निशामक दस्ते के लोगों को आकर यह आग बुझानी पड़ी है। 1 जून 2025 को ददुमाजरा लैंडफ़िल साइट जोकि 45 एकड़ में फैला कूड़ा का पहाड़ है यहाँ पर भयानक आग लग गयी थी। यह आग तेज हवाओं के कारण तेज़ी से बड़े क्षेत्र में फैल गयी थी। इस आग से निकलने वाले घने काले धुएं ने आसपास के रिहायशी इलाक़ों को घेर लिया था। लोगों में दहशत फैल गई थी लोगों का दम घुटने लगा था और सांस की तकलीफ़ और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो गयी थीं। उस समय आग बुझाने के लिए सेक्टर 38, 17, 32, रामदरबार और मनीमाजरा से एक दर्जन से ज़्यादा फ़ायर ब्रिगेड गाड़ियां लगाई गईं थीं । यही स्थिति राम दरबार के सामने खुले मैदान पर पड़े कूड़े के ढेर पर कई बार हो चुकी हैं। चंडीगढ़ के सिटी ब्यूटीफ़ुल होने के तमाम सरकारी दावों के बावजूद अभी भी यहाँ की बड़ी व घनी आबादी जिन समस्याओं का शिकार है उन्हें देखकर तो यही कहा जा सकता है कि चंडीगढ़ के नाम तो बड़े हैं परन्तु दर्शन छोटे हैं। ईएमएस / 25 मार्च 26