अंतर्राष्ट्रीय
25-Mar-2026
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तेल अवीव,(ईएमएस)। इजरायल में इन दिनों एक महिला पुलिस अधिकारी की बहादुरी और दृढ़ संकल्प की हर तरफ चर्चा हो रही है। रिनात सबान, जो पेशे से एक पुलिस डिटेक्टिव (जासूस) हैं, ने अपने हक और प्रमोशन के लिए सरकार के एक कद्दावर मंत्री के खिलाफ साल भर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः जीत हासिल की। यह मामला इसलिए खास है क्योंकि रिनात ने सीधे तौर पर सत्ता को चुनौती दी और अदालत के जरिए नेतन्याहू सरकार के फैसले को पलटने पर मजबूर कर दिया। हाल ही में रिनात सबान को चीफ सुपरिंटेंडेंट के पद पर प्रमोट किया गया है। उनकी इस उपलब्धि की राह आसान नहीं थी, क्योंकि इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इटमार बेन ग्विर ने इस प्रमोशन का पुरजोर विरोध किया था। इसके बावजूद रिनात ने हार नहीं मानी और कानूनी जंग जीत ली। स्थिति यह रही कि मंत्री की आपत्तियों के बाद भी अदालत ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई और उनके हस्ताक्षर के बिना ही प्रमोशन की फाइल को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक आदेश दिया। रिनात के प्रमोशन को रोके जाने के पीछे की वजह पेशेवर से ज्यादा राजनीतिक मानी जा रही थी। पिछले साल मार्च से ही धुर-दक्षिणपंथी मंत्री बेन ग्विर प्रमोशन की फाइल पर साइन करने से इनकार कर रहे थे, जबकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरी तरह रिनात के समर्थन में थे। दरअसल, रिनात सबान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले की जांच की थी और बाद में उस केस में गवाही भी दी थी। मंत्री की नाराजगी की मुख्य वजह यही जांच मानी गई। यरुशलम की जिला अदालत ने पिछले महीने मंत्री के इस कदम को गैरकानूनी करार देते हुए स्पष्ट कहा कि फाइल रोकना बाहरी और असंगत कारणों से प्रेरित लगता है। जब अदालत के आदेश के बाद भी मंत्री अपनी जिद पर अड़े रहे, तो कोर्ट ने पांच दिन का अल्टीमेटम जारी कर दिया। अंततः, बिना मंत्री के हस्ताक्षर के एक समारोह में रिनात को उनके नए पद पर नियुक्त किया गया। अपनी जीत के बाद रिनात सबान ने बेबाकी से कहा कि जब किसी सही चीज के लिए लड़ना जरूरी हो, तो हम जरूर लड़ेंगे। उन्होंने अपनी सहकर्मी रूती हाउसलिच का भी जिक्र किया, जिनका प्रमोशन भी इसी तरह राजनीतिक कारणों से अटका हुआ है। रिनात की यह जीत इजरायल के प्रशासनिक गलियारों में न्याय और साहस की मिसाल बन गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/25मार्च2026