मुम्बई (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्वर ने लीग की शुरुआत से ठीक पहले नाम वापस लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों को आड़े हाथों लिया है। गावस्कर ने कहा कि इस प्रकार का रवैया ठीक नहीं है। इसके खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरुरत है। पिछले कुछ समय से लगातार देखने में आया है कि खिलाड़ी लीग से पहले कई प्राकर की बहानेबाजी कर हट जाते हैं जिससे टीम को नुकसान होता है। गावस्कर ने कहा कि टीम करोड़ों रुपये देकर जब इन खिलाड़ियों का अनुबंधित करती। इसके बाद टीम की रणनीत बनती है पर इनके नहीं खेलने से सब बेकार हो जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार गावस्कर का कहना गलत नहीं है। टीम नीलामी में करोड़ों रुपये खर्च कर विदेशी खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ती हैं, उनकी भूमिका तय करती हैं और उसी हिसाब से टीम का संयोजन बनाती हैं। वहीं जब यही खिलाड़ी टूर्नामेंट के अहम समय पर गायब हो जाते हैं, उसके लिए सभी कुछ बेकार हो जाता है। आमतौर पर चोट, वर्कलोड मैनेजमेंट, या फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए खिलाड़ी हटते हैं।यह अपने आप में गलत नहीं है। किसी भी खिलाड़ी का फिट रहना और लंबे समय तक खेलना प्राथमिकता होनी चाहिए पर ये सवाल यह है कि जब खिलाड़ी आईपीएल अनुबंध करते हैं तभी उन्हें सभी बातों का ध्यान रखना चाहिये। यहां मामला ‘उपलब्धता’ से ज्यादा ‘प्राथमिकता’ का है। इससे आईपीएल की साख भी प्रभावित हो रही है। ऐसा लगता हैक िआईपीएल विदेशी खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक विकल्प बनकर रह गया है, जहां वे सुविधा के अनुसार खेलते हैं और असुविधा होते ही हट जाते हैं जिस स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे खिलाड़ियों को लीग से प्रतिबंधित कर दिया जान चाहिये। ऐसे में फ्रेंचाइजियां को अपने चयन में अधिक सतर्कता रखते हुए केवल उसी खिलाड़ी को शामिल करना चाहिये जो खेलन को लेकर गंभीर हो। खिलाड़ी की उपलब्धता और प्रतिबद्धता के ट्रैक रिकॉर्ड को भी चयन में पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ईएमएस 26 मार्च 2026