29-Mar-2026
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प्योंगयांग,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच अब उत्तर कोरिया ने भी अपनी सैन्य गतिविधियों से वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की मौजूदगी में रविवार को एक शक्तिशाली सॉलिड फ्यूल इंजन का सफल परीक्षण किया गया। साथ ही अमेरिका को चेतावनी देते हुए ईरान पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल की कड़ी आलोचना की है। इस इंजन का मुख्य उद्देश्य ऐसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार करना है, जो सीधे अमेरिकी मुख्यभूमि (मेनलैंड) तक मार करने में सक्षम हों। जानकारों का मानना है कि यह परीक्षण उत्तर कोरिया के उस पांच साल के सैन्य अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर पहुंचाना है।आधिकारिक बयानों के अनुसार, किम जोंग उन ने ईरान पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिका और इजरायल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने संबोधन में अमेरिका के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उसे आतंकवादी तक कह डाला। उत्तर कोरिया द्वारा परीक्षित यह नया इंजन 2500 किलोटन तक का पेलोड (हथियार) ले जाने की क्षमता रखता है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में भी इसी तरह के एक इंजन का परीक्षण किया गया था, जिसकी क्षमता 1900 किलोटन थी। इंजन की शक्ति में यह भारी बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरिया अब एक ही मिसाइल पर कई परमाणु आयुध लगाने की तकनीक पर काम कर रहा है, जिससे अमेरिकी रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो सके। रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ठोस ईंधन (सॉलिड फ्यूल) आधारित मिसाइलें तरल ईंधन वाली मिसाइलों की तुलना में अधिक खतरनाक होती हैं, क्योंकि इन्हें गुप्त रूप से तैनात किया जा सकता है और इनके प्रक्षेपण का पहले से पता लगाना बेहद कठिन होता है। किम जोंग उन ने इस परीक्षण को देश की सामरिक सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अमेरिका विरोधी भावनाओं के बीच उत्तर कोरिया एक मजबूत भूमिका निभाएगा। हालांकि अपने भाषण में किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि उनके दुश्मन चाहे टकराव का रास्ता चुनें या शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का, उत्तर कोरिया हर स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के युद्ध पर टिकी हैं। प्योंगयांग की इस बढ़ती सैन्य सक्रियता ने न केवल वाशिंगटन बल्कि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे पड़ोसी देशों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026 --------------------------------