* पीएम मोदी करेंगे राज्यभर में 651 करोड़ की लागत से बने आवासों का उद्घाटन - ‘विकसित गुजरात’ की दिशा में बड़ा कदम गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) – पीएमएवाय-जी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बेघर और कच्चे मकानों में निवास करने वाले परिवारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना केवल ईंट-पत्थर का मकान नहीं देती, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थिरता का घर प्रदान करती है। इस दिशा में राज्य सरकार भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आगामी 31 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्ते राज्य के विभिन्न जिलों में निर्मित कुल 38,949 आवासों का राज्यव्यापी लोकार्पण किया जाएगा। लगभग 651 करोड़ रुपये की लागत से बने ये आवास गरीब परिवारों के जीवन में सुख और समृद्धि का नया सूरज लेकर आएंगे। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में और ग्राम विकास मंत्री कुंवरजी बावलिया के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के संकल्प को और मजबूत किया है। वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 1,755 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान वर्ष 2025-26 में राज्य ने रिकॉर्ड 1,20,381 आवासों का निर्माण कर लाभार्थियों को 1,037.84 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। साथ ही 100 प्रतिशत राज्य फंड के तहत 470 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त सहायता दी गई है, जो “अविरत गुजरात, विकसित गुजरात” के संकल्प को साकार करता है। पीएमएवाय-जी के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 अनुपात में लाभार्थियों को कुल 1.20 लाख रुपये की चरणबद्ध सहायता दी जाती है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रावधानों के तहत छत स्तर (रूफ-कास्ट) पर 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। यदि लाभार्थी पहले किश्त मिलने के 6 महीनों के भीतर घर पूरा कर लेते हैं, तो उन्हें 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिलती है। महिलाओं की सुविधा के लिए बाथरूम निर्माण हेतु 5 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। साथ ही मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी के रूप में 25,920 रुपये तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। राज्य सरकार ‘आवास प्लस सर्वेक्षण 2024’ के माध्यम से छूटे हुए पात्र परिवारों को भी योजना में शामिल करने का कार्य कर रही है, ताकि ‘विकसित गुजरात @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त कर ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार किया जा सके। वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक राज्य को केंद्र सरकार द्वारा 8,38,396 आवासों का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से 8,29,221 आवास स्वीकृत किए गए हैं। अब तक 6,92,554 परिवार अपने सपनों का घर बना चुके हैं और इस योजना के तहत कुल 9,083.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। * जिलावार प्रमुख आवास वितरण (31 मार्च 2026): पंचमहल में 10,572 आवास (179.18 करोड़ रुपये), सौराष्ट्र-कच्छ के 12 जिलों में 3,976 आवास (66.54 करोड़ रुपये), महिसागर में 3,222 आवास (54.57 करोड़ रुपये), नर्मदा में 2,367 आवास (39.69 करोड़ रुपये), खेड़ा में 2,345 आवास (39.67 करोड़ रुपये), मेहसाणा में 2,281 आवास (38.57 करोड़ रुपये), दाहोद में 1,804 आवास (30.57 करोड़ रुपये), साबरकांठा में 1,717 आवास (28.89 करोड़ रुपये), छोटाउदेपुर में 1,694 आवास (28.45 करोड़ रुपये), अरवल्ली में 1,556 आवास (24.31 करोड़ रुपये), पाटन में 1,237 आवास (20.88 करोड़ रुपये), तापी में 949 आवास (15.88 करोड़ रुपये), सूरत में 933 आवास (15.29 करोड़ रुपये), वलसाड में 834 आवास (13.37 करोड़ रुपये), बनासकांठा में 699 आवास (11.56 करोड़ रुपये), डांग में 678 आवास (9.95 करोड़ रुपये), नवसारी में 627 आवास (9.70 करोड़ रुपये), अहमदाबाद में 345 आवास (5.76 करोड़ रुपये), वाव-थराद में 300 आवास (5.10 करोड़ रुपये), भरूच में 263 आवास (4.14 करोड़ रुपये), गांधीनगर में 230 आवास (3.90 करोड़ रुपये), वडोदरा में 182 आवास (2.87 करोड़ रुपये) और आणंद में 138 आवास (2.17 करोड़ रुपये) तैयार किए गए हैं। सतीश/29 मार्च