ज़रा हटके
31-Mar-2026
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-अमेरिकी संसद की रिसर्च यूनिट की एक ताजा रिपोर्ट ने खोली पोल वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी संसद की रिसर्च यूनिट अमेरिकी कांग्रेस अनुसंधान सेवा की एक ताजा रिपोर्ट ने भारत के उन आरोपों को और बल मिला जिनमें पाकिस्तान से संचालित हो रहे आतंकी संगठनों की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर से जुड़े आतंकवादी नेटवर्क पर इस रिपोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की जमीन से भारत और खासकर कश्मीर में कई आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हरकत-उल जिहाद इस्लामी, हरकत उल-मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। ये सभी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान लंबे समय से कई आतंकी संगठनों का केंद्र रहा है, जिनमें से कई 1980 के दशक से सक्रिय हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इन पर कार्रवाई के लिए कई सैन्य अभियान और नीतिगत कदम उठाए हैं, लेकिन इन संगठनों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। बता दें यह रिपोर्ट दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के एलन क्रोनस्टाड्ट द्वारा तैयार की गई है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य अमेरिकी सांसदों को क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति से अवगत कराना है। इसमें आतंकी संगठनों को पांच श्रेणियों में बांटा गया है। वैश्विक, अफगानिस्तान केंद्रित, भारत केंद्रित, घरेलू और सांप्रदायिक विशेषकर शिया विरोधी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में पाकिस्तान द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय कार्ययोजना का उद्देश्य देश में किसी भी सशस्त्र मिलिशिया को सक्रिय नहीं रहने देना था। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों, हवाई हमलों और हजारों खुफिया आधारित ऑपरेशनों के बाद भी इन संगठनों को समाप्त नहीं किया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक कई बड़े सैन्य अभियान और सैकड़ों हजार खुफिया ऑपरेशन भी उन आतंकी संगठनों को खत्म करने में असफल रहे हैं, जिन्हें अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया है और जो अब भी पाकिस्तान में सक्रिय हैं। रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि पाकिस्तान खुद भी आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित है। 2003 के बाद से देश में आतंकी हमलों की संख्या और प्रभाव बढ़ा है, जिससे वह दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। सिराज/ईएमएस 31 मार्च 2026