जो हथियार उठाएगा, उसे हिसाब देना होगा....... गृह मंत्री बोले— बस्तर में नक्सलवाद लगभग खत्म, विकास से बदली तस्वीर -31 मार्च तक उन्मूलन का रखा गया था लक्ष्य नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को नक्सलवाद के मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि “जो हथियार उठाएगा, उसे हिसाब देना होगा।” उन्होंने देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में अब नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है और वहां विकास की नई धारा बह रही है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने संसद में इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति देने के लिए स्पीकर ओम बिरला के प्रति आभार जताया और कहा कि 1970 से 2026 तक की घटनाओं की श्रृंखला पर चर्चा देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यह मुद्दा व्यापक बहस से दूर रहा, जबकि इससे देश के हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। गृह मंत्री शाह ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के गांवों में स्कूल खोलने, राशन की दुकानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और गैस चूल्हों के वितरण जैसी योजनाओं ने आम लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। शाह ने सवाल उठाया कि जो लोग पहले नक्सलवाद का समर्थन करते थे, उन्होंने इन बुनियादी सुविधाओं के लिए पहले प्रयास क्यों नहीं किए। नक्सलवाद के कारण हुए नुकसान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस हिंसा में लगभग 20 हजार युवाओं की जान गई और कई लोग दिव्यांग हो गए। उन्होंने इसे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि संसद को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था। अमित शाह ने नक्सलवाद को केवल विकास की कमी का परिणाम मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह एक विचारधारा से प्रेरित समस्या है, जिसे समय के साथ बढ़ावा मिला और इसका विस्तार हुआ। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गृह मंत्री शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि इस दिशा में तेजी से काम हुआ है। लोकसभा में नियम 193 के तहत इस विषय पर चर्चा की शुरुआत शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने की थी, जिसके बाद अन्य सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया और अब शाम को गृह मंत्री ने विस्तृत जवाब दिया। अपने जवाब में केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले 12 राज्यों और आदिवासी समुदायों की ओर से वे इस चर्चा के लिए आभार व्यक्त करते हैं। शाह के अनुसार, इन क्षेत्रों के लोग लंबे समय से चाहते थे कि उनकी समस्याएं संसद में उठें और देश तथा दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति सामने आए। गृह मंत्री शाह के लोकसभा में दिए गए इस आशय के बयान के बाद नक्सलवाद पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब सरकार ने इसके पूर्ण उन्मूलन के लिए सख्त समयसीमा तय कर रखी है। हिदायत/ईएमएस 30मार्च26