इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के भीतर उस समय हड़कंप मच गया जब इसके सरगना मसूद अजहर के बड़े भाई ताहिर अनवर की अचानक मौत की खबर सामने आई। ताहिर की मौत का कारण अभी भी रहस्य बना हुआ है। मसूद अजहर, जो पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में अपने परिवार के कई सदस्यों को खो चुका है, उसके लिए ताहिर की मौत एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है। ताहिर अनवर महज मसूद अजहर का भाई नहीं था, बल्कि वह जैश-ए-मोहम्मद के तमाम आतंकी मंसूबों का मुख्य रणनीतिकार और फ्रेमवर्क तैयार करने वाला मास्टरमाइंड था। 11 भाई-बहनों में सबसे बड़ा होने के कारण ताहिर का कद संगठन में बहुत ऊंचा था। साल 2000 में जैश की स्थापना के समय से ही उसने पर्दे के पीछे रहकर सैन्य मामलों की कमान संभाली थी। जहां मसूद अजहर सार्वजनिक रूप से जहर उगलने और संगठन का चेहरा बनने के लिए जाना जाता था, वहीं ताहिर ने कभी खुद को सार्वजनिक नहीं किया। वह बहावलपुर स्थित जैश के मुख्यालय मरकज उस्मान ओ अली से ही अपनी गतिविधियों को संचालित करता था। आतंकी संगठन में ताहिर अनवर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उसे संगठन की रीढ़ माना जाता था क्योंकि आतंकियों की भर्ती से लेकर उनके प्रशिक्षण शिविरों के संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी उसी के पास थी। हाल ही में ताहिर ने एक बेहद खतरनाक कदम उठाते हुए जैश की महिला आतंकी विंग जमात उन मोमिनत की शुरुआत की थी। वह इन महिलाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित कर रहा था ताकि संगठन को एक नया और घातक विस्तार दिया जा सके। मसूद अजहर के लिए यह झटका इसलिए भी गहरा है क्योंकि पिछले वर्ष भारतीय सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर में उसके परिवार के 10 सदस्यों सहित 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। उस समय मसूद के किले को संभालने में ताहिर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। अब ताहिर की मौत के बाद जैश के भीतर उत्तराधिकार और कमान को लेकर आपसी जंग छिड़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर कई लोग ताहिर को नरमदिल और हकीम साहब कहकर संबोधित कर रहे हैं, जो वहां पनप रहे आतंकी हमदर्दों की मानसिकता को दर्शाता है। बहरहाल, जैश के सैन्य मामलों के प्रमुख की मौत ने भारत विरोधी गतिविधियों के ढांचे को कमजोर किया है और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और प्रशिक्षण प्रणालियों पर गहरा असर पड़ेगा। ताहिर का जाना जैश-ए-मोहम्मद के उस संगठित आतंकी तंत्र के पतन की शुरुआत हो सकती है जिसे उसने दो दशकों में तैयार किया था। वीरेंद्र/ईएमएस/31मार्च2026