लेख
02-Apr-2026
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- सूली से उठती शांति की पुकार (गुड फ्राइडे (3 अप्रैल) पर विशेष) यीशु (ईसा मसीह) के बलिदान और उनकी शिक्षाओं को याद करने का दिन है ‘गुड फ्राइडे’। दरअसल ईसा मसीह ने मानवता की भलाई के लिए बलिदान दिया। ईसाई मान्यता के अनुसार दुनिया को प्रेम, दया, करुणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार और पवित्र आचरण का संदेश देने वाले यीशु को इसी दिन उस जमाने के धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा क्रॉस पर चढ़ाया गया था। जिस दिन ईसा मसीह ने प्राण त्यागे थे, उस दिन शुक्रवार था और इसी याद में ‘गुड फ्राइडे’ मनाया जाता है। ईस्टर के रविवार से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है और इस वर्ष गुड फ्राइडे 3 अप्रैल को मनाया जा रहा है। ईसाई समुदाय द्वारा इस त्यौहार को शोक के रूप में मनाया जाता है। गुड फ्राइडे को यीशु द्वारा मानवता की भलाई के लिए दिए बलिदान के रूप में देखा जाता है। गुड फ्राइडे के दिन गिरजाघरों में घंटा नहीं बजाया जाता बल्कि लकड़ी के खटखटे बजाए जाते हैं और लोग चर्च में क्रॉस को चूमकर यीशु का स्मरण करते हैं। कुछ स्थानों पर लोग काले कपड़े पहनकर प्रभु यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं और यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। ईसा मसीह के सूली पर चढ़ाए जाने की याद में इस दिन उनके अनुयायी समस्त लौकिक सुविधाओं का त्याग कर देते हैं। इस दिन चर्च और घरों से सजावटी वस्तुएं हटा दी जाती हैं या उन्हें कपड़े से ढ़क दिया जाता है। कैथोलिकों द्वारा शुरू की गई प्रथा के अनुसार गुड फ्राइडे के ठीक 40 दिन पहले आने वाले बुधवार से ईसाई समुदाय में प्रार्थना और उपवास प्रारंभ हो जाते हैं। इस बुधवार को ‘राख का बुधवार’ कहा जाता है। उपवास के दौरान लोग केवल शाकाहारी और सात्विक भोजन करते हैं। माना जाता है कि यीशु ने मानव सेवा प्रारंभ करने से पहले चालीस दिन तक व्रत किया था और संभवतः इसीलिए उपवास की यह परम्परा शुरू हुई। इस दिन दुनियाभर के ईसाई सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चर्च में चंदा या दान देते हैं। ईसाई धर्म में ईसा मसीह को परमेश्वर का पुत्र माना जाता है। उन्होंने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करूणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार और पवित्र आचरण का उपदेश दिया और उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे थे। कहा जाता है कि वे यरूशलम के गैलिली प्रांत में लोगों को मानवता, सत्य, एकता, प्रेम, अहिंसा और शांति का उपदेश दिया करते थे। उनके संदेश दूर-दूर तक फैलने लगे और उनके विचारों को लोग अपने जीवन में अपनाने लगे। वहां के लोग उन्हें परमपिता परमेश्वर का दर्जा देने लगे थे। समाज में धार्मिक अंधविश्वास और झूठ फैलाने वाले धर्मगुरूओं को इसी कारण ईसा मसीह से काफी जलन होने लगी थी क्योंकि लोग अपनी समस्याओं को लेकर अब उनके पास नहीं आ रहे थे। करीब दो हजार वर्ष पूर्व उन्हें मृत्युदंड इसीलिए दिया गया क्योंकि वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और घोर विलासिता तथा अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरूक कर रहे थे। ईसा मसीह केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं बल्कि परिवर्तन और करुणा के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने मानव प्रेम की सीमाओं को तोड़ते हुए उसे आत्मकेन्द्रितता और स्वार्थ से परे ले जाने का संदेश दिया। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सच्चा प्रेम त्याग, क्षमा और समर्पण में निहित होता है। जब पृथ्वी पर पाप और अन्याय बढ़ रहे थे, तब ईसा ने अपने बलिदान के माध्यम से निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा को चरितार्थ किया। क्रॉस पर उनकी पीड़ा केवल एक व्यक्ति का कष्ट नहीं थी बल्कि संपूर्ण मानवता के उद्धार का प्रतीक बन गई। ईसाई मान्यताओं के अनुसार, क्रूस पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन, रविवार को ईसा मसीह पुनः जीवित हो उठे थे। यही कारण है कि गुड फ्राइडे के बाद आने वाला रविवार ‘ईस्टर संडे’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन केवल पुनरुत्थान का उत्सव नहीं, बल्कि आशा, नवजीवन और विश्वास की पुनर्स्थापना का संदेश देता है। कहा जाता है कि पुनर्जीवित होने के बाद ईसा ने लगभग 40 दिनों तक अपने शिष्यों और अनुयायियों को दर्शन दिए, उन्हें सत्य, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। ईस्टर की आराधना विशेष रूप से उषाकाल में की जाती है। मान्यता है कि पुनरुत्थान का यह चमत्कार प्रातःकाल ही हुआ था और सबसे पहले मरियम मदीलिनी ने ईसा को जीवित देखा था। यह प्रसंग इस तथ्य को भी उजागर करता है कि सत्य और आस्था का प्रकाश सबसे पहले उन हृदयों में जागृत होता है, जो श्रद्धा और विश्वास से परिपूर्ण होते हैं। इस प्रकार, गुड फ्राइडे हमें त्याग, धैर्य और प्रेम की शिक्षा देता है तो ईस्टर संडे जीवन में आशा और नवचेतना का संदेश लेकर आता है। दोनों मिलकर यह बताते हैं कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, अंततः प्रकाश और सत्य की ही विजय होती है। (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं) ईएमएस / 02 अप्रैल 26