अंतर्राष्ट्रीय
02-Apr-2026


वाशिंगटन(ईएमएस)। ईरान से मुंह का खा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खिसियाकर अपने लोगों गंभीर और आपत्तिजनक आरोप मंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ईरान में जमा हुआ बैलेस्टिक मिसाइलों के जखीरे के लिए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने साफ कहा कि 2015 में ईरान परमाणु समझौता हुआ था उस वक्त ईरान अमेरिका की कमजोरी पर हंस रहा था। यह ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन अमेरिका के लिए एक अपमानजनक समझौता था। ट्रंप का मानना है कि इस डील के जरिए तेहरान को परमाणु कार्यक्रम रोकने के नाम पर भारी आर्थिक राहत दी गई, जिसका इस्तेमाल उसने अपनी सैन्य शक्ति और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को बढ़ाने में किया। ट्रंप ने गर्व के साथ कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस दोषपूर्ण करार को दुरुस्त करने का काम किया है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के 34वें दिन, युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। ईरान को जल्द घुटनों पर लाने की रणनीति उम्मीद के मुताबिक सफल न होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विफलताओं का ठीकरा पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर फोड़ दिया है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए ओबामा प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी ने ईरान के साथ यह अंतरराष्ट्रीय समझौता किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के यूरेनियम संवर्धन को सीमित करना और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को उसके ठिकानों की जांच की अनुमति देना था, ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके। बदले में ईरान पर लगे कड़े आर्थिक और तेल निर्यात संबंधी प्रतिबंध हटाए गए थे, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को बड़ी संजीवनी मिली थी। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप शुरू से ही इस नीति के विरोधी रहे हैं। उनका तर्क है कि ईरान को किसी भी तरह की परमाणु तकनीक रखने का हक नहीं होना चाहिए। मौजूदा युद्ध में जब ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता और भौगोलिक स्थिति (होर्मुज) का इस्तेमाल कर वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को चुनौती दी है, तो ट्रंप इसे ओबामा काल की नरम नीति का परिणाम बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान घरेलू राजनीति और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के बीच अपनी रणनीति को सही ठहराने की एक कोशिश है, क्योंकि अब यह साफ हो गया है कि ईरान को हराना उतना आसान नहीं है जितना शुरू में सोचा गया था। वीरेंद्र/ईएमएस/02अप्रैल2026