राष्ट्रीय
02-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें साल 2027 की पहली छमाही में मोदी सरकार को सौंप सकता है। इसके पहले, केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों पर सुझाव लेने के लिए गठित वेतन आयोग ने 18 सवालों वाला एक प्रश्नपत्र जारी किया है। इस पर प्रतिक्रिया देकर केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की शीर्ष संस्था एनसी-जेसीएम (स्टाफ साइड) ने वेतन आयोग से कुछ अहम बिंदुओं को जोड़ने की अपील की है। ये अहम मुद्दे केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और लीव से जुड़े हैं। एनसी-जेसीएम का कहना है कि जो कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत आते हैं और जिन्होंने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को चुना है, उन्हें कई तरह की समस्याओं, शिकायतों और मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद सरकारी कर्मचारियों पर कोई भी कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम लागू नहीं की जानी चाहिए। एनसी-जेसीएम के मुताबिक कर्मचारियों की मांग है कि सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 (अब 2021) के तहत नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करे। इस संबंध में सभी संबंधित पक्षों के विचार प्रस्तुत करने के लिए एक प्रावधान की मांग की गई है। पेंशनर्स के मुद्दों को भी विशेष रूप से शामिल करने की मांग की गई है। वेतन आयोग से कहा गया है कि पेंशन संशोधन, समानता, कम्यूटेड वैल्यू की बहाली और अन्य कल्याणकारी उपायों पर अलग से विचार किया जाना चाहिए। वहीं महिला कर्मचारियों के लिए भी कई अहम मांग किए गए हैं। कर्मचारियों की सिक्योरिटी, मैटरनिटी बेनिफिट, पीरियड से जुड़े लीव, चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल), कार्यस्थल पर समानता और अन्य वेलफेयर स्कीम्स की मांग की गई। एनसी-जेसीएम ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों की समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए उनके लिए अलग से सुझाव देने का विकल्प होना चाहिए। सुझाव देने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की गई है। एनसी-जेसीएम ने कहा कि देशभर में फैले संगठनों से राय लेने में समय लगता है, इसलिए विभागीय ज्ञापन जमा करने की तारीख 31 मई 2026 तक बढ़ाई जाए। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026