राष्ट्रीय
02-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। बीते साल हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका सेवानिवत्त हुए थे। बताया जाता हैं कि वे अपने करियर में कुल 66 बार ट्रांसफर हुए थे। उनकी पहचान स्थानांतरण को लेकर ही बनी थी। सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन डील से लेकर कई मामलों के कारण चर्चा में रहे खेमका की पहचान एक सख्त अधिकारी की रही। लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि सबसे ज्यादा ट्रांसफर रिकॉर्ड खेमका के नाम नहीं था, बल्कि हरियाणा के ही एक अन्य अधिकारी प्रदीप कासनी पर था। उनका 33 साल के आईएएस के कार्यकाल में कुल 70 बार स्थानांतरण हुआ था। इस तरह वे एक पोस्टिंग में 6 महीने भी औसतन नहीं रह पाए थे। उनका 2018 में रिटायरमेंट हुआ था, जब वह हरियाणा के लैंड यूज बोर्ड में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के तौर पर तैनात थे। उनकी आखिरी पोस्टिंग भी 6 महीने ही रही थी। रिटायरमेंट के बाद हरियाणा के आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने उन्हें टी पार्टी के लिए बुलाया था। लेकिन वह उसमें भी यह कहते हुए नहीं गए थे कि यह एसोसिएशन सही मुद्दों से भटक गई है। उनका कहना था कि अफसरों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके बारे में कभी यह एसोसिएशन बात नहीं करती है। दरअसल इन अधिकारियों का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि महाराष्ट्र के तुकाराम मुंधे इन दिनों चर्चा में हैं। उनका देवेंद्र फडणवीस सरकार ने ट्रांसफर किया है और अपने 21 साल के करियर में मुंधे का यह 24वां ट्रांसफर था। इसके बाद चर्चा हुई कि आखिर वे कौन से अधिकारी हैं, जिनके सबसे ज्यादा ट्रांसफर हुए हैं। इसी कड़ी में खेमका और प्रदीप कासनी जैसे अधिकारियों का नाम सामने आया। मुंबई स्थित मंत्रालय में दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव मुंधे का तबादला राज्य सचिवालय में सचिव, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, राजस्व और वन विभाग के पद पर किया है। उन्हें अगस्त 2025 में यानी एक साल से भी कम समय पहले दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव के पद पर तैनात किया गया था। महाराष्ट्र के बीड़ जिले के निवासी मुंधे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने स्थानीय सरकारी स्कूल से ही पढ़ाई की थी और अधिकारी भी बने। फिलहाल मुंधे की तुलना अशोक खेमका से की जा रही है। उन्हें महाराष्ट्र का खेमका कहा जा रहा है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026