राष्ट्रीय
02-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को रद्द करने और पाकिस्तान के हिस्से की नदियों का पानी रोकने के फैसले ने दक्षिण एशिया में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ी है। इसका असर तब सामने आ रहा है जब अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियां पहले ही अल नीनो के कारण कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति की आशंका जाहिर कर चुकी है। इसके बाद पाकिस्तान के लिए हालात आने वाले समय में और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पाकिस्‍तान की जनता को अपनी सरकार की काली करतूतों का खामियाजा गंभीर जल संकट के तौर पर भुगतना पड़ सकता है। दूसरी ओर कम बारिश होने के बावजूद भारत के पास सरप्‍लस वॉटर रहने की संभावना है, जिसका इस्‍तेमाल खेती के साथ ही पेयजल के लिए हो सकेगा। सिंधु जल समझौता (जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था) दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रहा है। इस समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का उपयोग करने का अधिकार था, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिलता रहा है। लेकिन अब भारत द्वारा समझौते को खत्म करने और पानी रोकने के संकेत से पाकिस्तान की कृषि और पेयजल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने वाला है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। पाकिस्‍तान का पंजाब और सिंध प्रांत (जो देश के प्रमुख कृषि क्षेत्र हैं) इन नदियों के जल पर टिके हुए हैं। यदि नदी के पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तब गेहूं, चावल और कपास जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय मौसम विभागों ने चेतावनी दी है कि इस साल अल नीनो प्रभाव के चलते दक्षिण एशिया में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका मतलब है कि न केवल नदियों में पानी का प्रवाह घटेगा, बल्कि भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जाएगा। पाकिस्तान जैसे देश (जहां पहले से ही जल प्रबंधन की समस्याएं हैं) वहां यह स्थिति आपातकाल का रूप ले सकती है। विश्व संसाधन संस्थान (डब्ल्यूआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त देशों में शामिल है। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार कम हो रही है और कई शहरों में पेयजल की कमी आम बात हो गई है। इसके बाद यदि भारत द्वारा पानी रोकने की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तब यह संकट और गहरा सकता है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026