राष्ट्रीय
03-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार बच्चों और किशोरों द्वारा सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिमों को देखते हुए नए दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय एक ऐसा संतुलित मॉडल विकसित करना है, जिसमें उम्र के आधार पर अलग-अलग स्तर की पहुंच और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस महत्वपूर्ण विषय पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ गहन चर्चा का दौर जारी है। प्रस्तावित नियमों के तहत मुख्य रूप से पेरेंटल कंट्रोल यानी अभिभावकों के नियंत्रण को मजबूत करने, स्क्रीन टाइम की एक निश्चित सीमा तय करने और कुछ संवेदनशील फीचर्स पर रोक लगाने जैसे सुझावों पर ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र की जांच के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण बच्चे गलत जानकारी देकर आसानी से अकाउंट बना लेते हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार अब अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से उन्नत पहचान प्रणालियों पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी यह तय होना बाकी है कि न्यूनतम उम्र सीमा 13 वर्ष रखी जाए या इसे बढ़ाकर 16 वर्ष किया जाए। इस योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच देखी जा रही है, जहां अक्सर एक ही मोबाइल फोन पूरे परिवार द्वारा साझा किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में उपयोगकर्ता की सटीक उम्र की पहचान करना और नियमों को कड़ाई से लागू करना काफी जटिल होगा। साथ ही, यदि उम्र सीमा 16 या 18 वर्ष तय की जाती है, तो डिजिटल पहुंच सीमित होने और गोपनीयता (प्राइवेसी) से जुड़े नए कानूनी सवाल भी खड़े हो सकते हैं। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य बच्चों को ऑनलाइन उपलब्ध हानिकारक सामग्री और साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है। इसके लिए आईटी नियमों में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं ताकि प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की जा सके। फिलहाल, सभी संबंधित पक्षों से राय ली जा रही है और एक व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही इस दिशा में अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि डिजिटल सुरक्षा और सूचना तक पहुंच के बीच एक सही संतुलन बना रहे। वीरेंद्र/ईएमएस 03 अप्रैल 2026