नई दिल्ली,(ईएमएस)। अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत सहित देश के कई राज्यों में मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। सामान्यतः गर्मी के आगमन का संकेत देने वाला यह समय इस बार तूफानी हवाओं, गरज-चमक और ओलावृष्टि की चपेट में है। मौसम विभाग ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि यह केवल स्थानीय बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा मौसमी तंत्र है जो कई राज्यों को प्रभावित कर रहा है। विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन और कृषि को भारी नुकसान होने की आशंका है। विशेष रूप से 4 अप्रैल से 7 अप्रैल के बीच मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है। इस मौसमी उथल-पुथल के पीछे दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की सक्रियता को जिम्मेदार माना जा रहा है। पहला सिस्टम 3 और 4 अप्रैल को अपना असर दिखा रहा है, जबकि दूसरा 7 अप्रैल के आसपास और अधिक सक्रिय होगा। दिल्ली-एनसीआर में भी इसका व्यापक असर दिखने की संभावना है, जहाँ धूल भरी आंधी और तेज बारिश के साथ विजिबिलिटी कम हो सकती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों और बुंदेलखंड में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, क्योंकि यहाँ बड़े आकार के ओले गिरने की संभावना है, जो गेहूं की तैयार फसल को बर्बाद कर सकते हैं। इसके अलावा, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी धूल भरी आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहाँ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में भारी बारिश के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। भूस्खलन और रास्तों के अवरुद्ध होने की आशंका के कारण पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है। मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसी तरह की अस्थिरता बनी हुई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि तापमान में गिरावट से अस्थायी राहत तो मिलेगी, लेकिन बिजली गिरने और तेज आंधी के कारण ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। लोगों को घरों के भीतर रहने और मौसम विभाग के अपडेट्स का लगातार पालन करने का निर्देश दिया गया है। वीरेंद्र/ईएमएस/04अप्रैल2026