कोलकाता(ईएमएस)।कभी चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले पवन कुमार रुइया ने सपनों को बड़ा आकार देने की ठानी थी। संख्याओं की दुनिया से निकले रुइया ने कारोबार की राह पकड़ी और धीरे-धीरे उद्योग जगत में अपनी पहचान बना ली। कोलकाता से शुरू हुआ उनका सफर चेन्नई और मुंबई तक पहुंचा। उन्होंने टायर, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश किया और ‘रुइया ग्रुप’ का विस्तार किया। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी कंपनियों का कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। लेकिन सफलता की इस चमक के पीछे कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं के बादल घिरने लगे। बैंकों से लिए गए भारी ऋण, कंपनियों की गिरती साख और भुगतान में चूक ने मुश्किलें बढ़ा दीं। आरोप लगे कि कारोबारी फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं। मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और रुइया का नाम कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों में उछला। जो शख्स कभी उद्योग जगत में उभरते सितारे के रूप में देखा जाता था, वही कानूनी पचड़ों में घिर गया। रुइया की कहानी सफलता, जोखिम और विवादों का मिश्रण है—जहां ऊंचाइयों की उड़ान के साथ पतन की पटकथा भी लिखी गई। नंदिनी परसाई/4 अप्रैल 2029