राज्य
04-Apr-2026
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हरिद्वार (ईएमएस)। पतंजलि विश्वविद्यालय में ताइवान से आए प्रशिक्षुओं ने छह दिवसीय ‘इंटीग्रेटेड योग एवं आयुर्वेद प्रशिक्षण शिविर’ सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह शिविर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आध्यात्मिक आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। समापन अवसर पर यज्ञ एवं उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया। जिसने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की गरिमा को प्रदर्शित किया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव ने ताइवान से आए योग प्रशिक्षुओं को भारत की हजारों वर्ष पुरानी वैदिक परंपराओं एवं उपचार पद्धतियों के बारे में अवगत कराया। साथ ही उन्होंने योग और आयुर्वेद के माध्यम से समग्र विश्व के कल्याण, भारत के महत्व और प्रचार-प्रसार हेतु आशीर्वचन प्रदान किए। प्रतिभागियों को योग, ध्यान, प्राणायाम, पंचकर्म, षटकर्म, आयुर्वेदिक आहार-विज्ञान, जीवनशैली सिद्धांत और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान का वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही भगवद्गीता, पतंजलि योगसूत्र, आसन, मुद्रा, बंध और मर्म चिकित्सा का परिचय दिया गया। प्रतिभागियों ने इसे “आत्मा को स्पर्श करने वाला अनुभव” बताया और कहा कि इससे शरीर, मन और चेतना को समझने में नई दृष्टि मिली। समापन कार्यक्रम में डॉ. (साध्वी) देवप्रिया, संकायाध्यक्ष- मानविकी एवं प्राच्य विद्या संकाय ने बताया कि योग की भूमिका, ध्यान, प्राणायाम और आयुर्वेद मानवता को स्वस्थ, संतुलित और जागरूक बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है, पतंजलि अपने स्तर पर यह प्रयास करता है कि वेद एवं उपनिषदों के ज्ञान के प्रचार के माध्यम से वर्तमान डिजिटल युग में मानवता की सेवा करना, यज्ञ के माध्यम से प्रकृति को शु) करना और संतुलित प्राणायाम के द्वारा तंत्रिकाओं को शांत रखनाकृये सभी सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने के अनिवार्य तरीके हैं। प्रति-कुलपति प्रो. मयंक अग्रवाल ने प्रशिक्षु को उत्तम भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी। डॉ. (प्रो.) वीके कटियार, (सेवानिवृत्त आईआईटी) का ताइवान के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कार्यक्रम की संकल्पना के लिए विशेष योगदान रहा। समापन कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दीपेश सक्सेना, शिक्षण और शोध संकायाध्यक्ष डॉ. ऋत्विक सहाय बिसारिया, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान के संकायाध्यक्ष डॉ. तोरण सिंह, कुलानुशासक स्वामी आर्षदेव, उप-कुलसचिव डॉ. निर्विकार, डॉ. आरती पाल उपस्थित रहे। शिविर में डॉ. आरती पाल ने प्रशिक्षण समन्वयक की प्रमुख भूमिका निभाई। शिविर में पतंजलि वेलनेस टीम और पतंजलि विश्वविद्यालय के शिक्षकों का योगदान उल्लेखनीय रहा। समापन कार्यक्रम में प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा प्रशिक्षार्थियों ने संस्कृत भाषा में योगसूत्र की सुंदर प्रस्तुति भी दी। (फोटो-16) शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/04 अप्रैल 2026