राष्ट्रीय
06-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नौवहन के लिए खोलने हेतु 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि यह समुद्री मार्ग नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस धमकी के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और बढ़ गई है। इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र क्षेत्र में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव रहे। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन वार्ताओं की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। वहीं, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विस्तार से बात की गई। कतर के प्रधानमंत्री और यूएई के विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत में भी पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों और संघर्ष को रोकने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत के लिए यह संकट अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि पश्चिम एशिया उसकी ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक रणनीतिक जलमार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध किए जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उछाल आया है। हालांकि ईरान ने भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों को मार्ग देने की बात कही है, लेकिन भारत का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी लंबी खिंचती है, तो देश की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत वर्तमान में निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए निरंतर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/06अप्रैल2026