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06-Apr-2026
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गाजा सिटी,(ईएमएस)। इजरायल के उन दावों को बड़ा झटका लगा है जिनमें हमास की शक्ति को पूरी तरह समाप्त करने की बात कही गई थी। हमास के सशस्त्र विंग इज्जुद्दीन अल-कसम ब्रिगेड्स के प्रवक्ता अबू ओबैदा ने एक टेलीविजन बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि संगठन हथियार डालने की किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20 सूत्रीय शांति योजना में शामिल निशस्त्रीकरण की शर्त को सीधे तौर पर खारिज करते हुए इसे फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ नरसंहार जारी रखने की एक खतरनाक साजिश करार दिया है। ओबैदा ने जोर देकर कहा कि जब तक इजरायल गाजा पट्टी से अपनी सेना पूरी तरह वापस नहीं बुलाता, तब तक हथियारों के मुद्दे पर कोई चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने मध्यस्थ देशों से अपील की कि वे पहले शांति योजना के उस चरण को लागू करवाएं जिसमें इजरायल की पूर्ण वापसी का प्रावधान है। हमास का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब इजरायल और अमेरिका लगातार यह प्रचार कर रहे थे कि हमास की सैन्य क्षमता और कमान पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। करीब 30 महीनों से जारी इस भीषण युद्ध के बावजूद हमास का यह बयान दर्शाता है कि संगठन अभी भी सक्रिय है और अपनी शर्तों पर कायम है। अबू ओबैदा ने अपने संबोधन में गाजा में हुए मानवीय नुकसान का भी जिक्र किया। आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक इजरायली हमलों में 72,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और पौने दो लाख के करीब घायल हुए हैं। हमास प्रवक्ता ने हाल के सीजफायर के दौरान भी हुए हमलों और इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों के लिए लाए गए मृत्युदंड के नए कानून की कड़ी निंदा की। उन्होंने वेस्ट बैंक के लोगों से इजरायली जेलों में बंद कैदियों को आजाद कराने के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। क्षेत्रीय समीकरणों पर बात करते हुए ओबैदा ने ईरान, लेबनान और यमन के हूती विद्रोहियों के समर्थन की सराहना की। उन्होंने ईरान और लेबनान पर हुए हालिया हमलों को अमेरिकी साजिश का हिस्सा बताया। हमास के इस ताजा रुख ने ट्रंप प्रशासन की शांति योजना के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हमास का यह पाताल लोक से वापसी जैसा तेवर इजरायल की उस रणनीति की विफलता को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य हमास को जड़ से मिटाना था। फिलहाल इजरायल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर है। वीरेंद्र/ईएमएस/06अप्रैल2026