क्षेत्रीय
06-Apr-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। सरकंडा स्थित स्फटिकेश्वर महादेव धाम में विराजित स्फटिक शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, स्फटिक शिवलिंग के दर्शन एवं पूजा से भक्तों को आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं, जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी मिलता है। मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक अमित तिवारी ने बताया कि देशभर में ऐसे केवल छह मंदिर हैं, जबकि यह धाम देश का सातवां और छत्तीसगढ़ का पहला स्फटिक शिव मंदिर है। यह बिलासपुर के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। हिमालयन क्वार्ट्ज (स्फटिक) से निर्मित यह शिवलिंग जयपुर में विशेष रूप से तराशा गया है, जिसकी लंबाई 18 इंच, गोलाई 24 इंच और वजन लगभग 51 किलोग्राम है। इसके साथ लगी जलहरी 35 किलोग्राम वजनी शुद्ध पीतल की है, जिसे उज्जैन में तैयार किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्फटिक शिवलिंग की पूजा से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं, कर्ज से मुक्ति मिलती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, यह पूजा स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर रोगों को दूर करने और मानसिक शांति देने में सहायक मानी जाती है। राहु, शनि एवं कालसर्प जैसे ग्रह दोषों के निवारण के लिए भी इसका रुद्राभिषेक अत्यंत प्रभावी माना गया है।हाल ही में 29 से 31 मार्च तक तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में कलश यात्रा, विभिन्न अधिवास, विशेष अभिषेक और महाआरती के साथ विशाल भंडारा आयोजित किया गया।इस धार्मिक आयोजन ने स्फटिकेश्वर महादेव धाम को क्षेत्र में एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। मनोज राज 06 अप्रैल 2026