बिलासपुर (ईएमएस)। बेहतराई रोड स्थित आर्य समाज में रविवार को आयोजित साप्ताहिक सत्संग में धार्मिक एवं ऐतिहासिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत हवन से हुई, जिसके पश्चात अध्यक्ष रूपलाल चावला ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपाध्यक्ष प्रेमांकुर गुप्ता ने वर्तमान समाज में सत्य के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गलत जानकारियों के कारण परिवार और सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है। मुख्य वक्ता आचार्य जयदेव शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश का इतिहास कई स्थानों पर तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है, जिससे नई पीढ़ी वास्तविक तथ्यों से दूर हो रही है। आचार्य शास्त्री ने विशेष रूप से हनुमान जी के संदर्भ में कहा कि उन्हें ‘बंदर’ के रूप में प्रस्तुत करना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है, बल्कि वे ‘वानर’ अर्थात एक विशिष्ट मानव वंश के वीर थे। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में आर्यावर्त में देव, आर्य, वानर और असुर—ये चार प्रमुख मानव वंश विद्यमान थे। वानर वंश क्षत्रिय परंपरा का शक्तिशाली और विद्वान वर्ग था, जिसमें शूरवीर, इंजीनियर, विद्वान और योगी शामिल थे। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि राम और लक्ष्मण ने हनुमान जी के ज्ञान और भाषा-कौशल की प्रशंसा की थी, जिससे उनके उच्च विद्वत्ता स्तर का प्रमाण मिलता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि युवाओं को सत्य इतिहास से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे पाखंड और भ्रामक धारणाओं से दूर रह सकें। अंत में आर्य समाज ने सभी परिवारों से अपील की कि वे प्रत्येक रविवार सत्संग में शामिल होकर अपने बच्चों को सही ज्ञान प्रदान करें। मनोज राज 06 अप्रैल 2026